sherKuch Alfaaz
कभी तो ख़त्म हो ये जंग जिस में
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@anand-verma
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Nazm
कभी तो ख़त्म हो ये जंग जिस में
तुम मेरे कमरे में रुक सकती हो पर मेरे कमरे में बस एक ही तकिया है
तड़पना हिज्र तक सीमित नहीं है उसे दुल्हन भी बनते देखना है
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