तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं
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Gulzar
@gulzar
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Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
इक ख़्वाब ने आँखें खोली हैं क्या मोड़ आया है कहानी में वो भीग रही है बारिश में और आग लगी है पानी में
sherKuch Alfaaz
हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते
sherKuch Alfaaz
दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है किस की आहट सुनता हूँ वीराने में
sherKuch Alfaaz
रुके रुके से क़दम रुक के बार बार चले क़रार दे के तिरे दर से बे-क़रार चले
sherKuch Alfaaz
ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में एक पुराना ख़त खोला अनजाने में
sherKuch Alfaaz
ज़िंदगी पर भी कोई ज़ोर नहीं दिल ने हर चीज़ पराई दी है
sherKuch Alfaaz
चंद उम्मीदें निचोड़ी थीं तो आहें टपकीं दिल को पिघलाएँ तो हो सकता है साँसें निकलें
sherKuch Alfaaz
आप के बा'द हर घड़ी हम ने आप के साथ ही गुज़ारी है
sherKuch Alfaaz
बे-सबब मुस्कुरा रहा है चाँद कोई साज़िश छुपा रहा है चाँद
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