ये दाढ़ियाँ ये तिलकधारियाँ नहीं चलतीं हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं
Writer
Kaif Bhopali
@kaif-bhopali
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Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
थोड़ा सा अक्स चाँद के पैकर में डाल दे तू आ के जान रात के मंज़र में डाल दे
sherKuch Alfaaz
माँ की आग़ोश में कल मौत की आग़ोश में आज हम को दुनिया में ये दो वक़्त सुहाने से मिले
sherKuch Alfaaz
जिस दिन मिरी जबीं किसी दहलीज़ पर झुके उस दिन ख़ुदा शिगाफ़ मिरे सर में डाल दे
sherKuch Alfaaz
कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा
sherKuch Alfaaz
एक कमी थी ताज-महल में मैं ने तिरी तस्वीर लगा दी
sherKuch Alfaaz
आग का क्या है पल दो पल में लगती है बुझते बुझते एक ज़माना लगता है
sherKuch Alfaaz
वो दिन भी हाए क्या दिन थे जब अपना भी तअल्लुक़ था दशहरे से दिवाली से बसंतों से बहारों से
sherKuch Alfaaz
साया है कम खजूर के ऊँचे दरख़्त का उम्मीद बाँधिए न बड़े आदमी के साथ
sherKuch Alfaaz
ज़िंदगी शायद इसी का नाम है दूरियाँ मजबूरियाँ तन्हाइयाँ
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