अपना पता मिले न ख़बर यार की मिले दुश्मन को भी न ऐसी सज़ा प्यार की मिले
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Kaifi Azmi
@kaifi-azmi
38
3
Sher
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Ghazal
29
Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँँ यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता
sherKuch Alfaaz
इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े
sherKuch Alfaaz
एक ज़ख़्म ऐसा न खाया कि बहार आ जाती दार तक ले के गया शौक़-ए-शहादत मुझ को
sherKuch Alfaaz
गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ
sherKuch Alfaaz
बहार आए तो मेरा सलाम कह देना मुझे तो आज तलब कर लिया है सहरा ने
sherKuch Alfaaz
ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा'द
sherKuch Alfaaz
मुद्दत के बा'द उस ने जो की लुत्फ़ की निगाह जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़े
sherKuch Alfaaz
रोज़ बस्ते हैं कई शहर नए रोज़ धरती में समा जाते हैं
sherKuch Alfaaz
पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो था जिस्म जल जाएँगे जब सर पे न साया होगा
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