sherKuch Alfaaz
शिकस्ता नाव समझ कर डुबोने वाले लोग न पा सके मुझे साहिल पे खोने वाले लोग
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@kashif-sayyed
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Ghazal
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शिकस्ता नाव समझ कर डुबोने वाले लोग न पा सके मुझे साहिल पे खोने वाले लोग
इक दूसरे को छोड़ के जाने की बात है अपनी नहीं ये सारे ज़माने की बात है
ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग
लोग हम सेे सीखते हैं ग़म छुपाने का हुनर आओ तुम को भी सिखा दें मुस्कुराने का हुनर
मुफ़लिसी थी और हम थे घर के इकलौते चराग़ वरना ऐसी रौशनी करते कि दुनिया देखती
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