उस ने फेंका मुझ पे पत्थर और मैं पानी की तरह और ऊँचा और ऊँचा और ऊँचा हो गया
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Kunwar Bechain
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
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दीवारों पर दस्तक देते रहिएगा दीवारों में दरवाज़े बन जाएँगे
sherKuch Alfaaz
प्यार में कैसी थकन कह के ये घर से निकली कृष्ण की खोज में वृषभानु-लली मीलों तक
sherKuch Alfaaz
तुम्हारे दिल की चुभन भी ज़रूर कम होगी किसी के पाँव का काँटा निकाल कर देखो
sherKuch Alfaaz
चेहरे को आज तक भी तेरा इंतिज़ार है हम ने गुलाल और को मलने नहीं दिया
sherKuch Alfaaz
उस ने मेरे छोटेपन की इस तरह इज़्ज़त रखी मैं ने दीवारें उठाईं उस ने उन पर छत रखी
sherKuch Alfaaz
शोर की इस भीड़ में ख़ामोश तन्हाई सी तुम ज़िन्दगी है धूप तो मद-मस्त पुर्वाई सी तुम
sherKuch Alfaaz
एक भी उम्मीद की चिट्ठी इधर आती नहीं हो न हो अपने समय का डाकिया बीमार है
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