ठीक है मैं फेर लेता हूँ नज़र को तुम भी झुमके से कहो गर्दन न चू
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Neeraj Neer
@neerajthepoet
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sherKuch Alfaaz
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वहम होता है कि छूने से सँवर जाएँगी सोचता हूँ जो मुक़द्दर मिरा ज़ुल्फ़ें तेरी
sherKuch Alfaaz
न पूछो मुझ सेे कैसी लगती हूँ मैं 'नीर' साड़ी में किसे अच्छे नहीं लगते मिरी जाँ गाने नुसरत के
sherKuch Alfaaz
इक दिए से एक कमरा भी बहुत है दिल जलाने से ये घर रौशन हुआ है
sherKuch Alfaaz
सिवाए तालियों के कुछ नहीं मिलता ग़ज़लगोई फ़क़त धंधा सुकूँ का है
sherKuch Alfaaz
सेठ बस साँसें हैं उस बेवा की गिरवी रखने को यूँँ भी क्या बचता है मंगलसूत्र को दे देने से
sherKuch Alfaaz
ठीक है मैं फेर लेता हूँ नज़र को तुम भी झुमके से कहो गर्दन न चू
sherKuch Alfaaz
ख़रीदो कौड़ियों के भाव में मुझ को मैं सस्ता हो गया हूँ उस के जाने से
sherKuch Alfaaz
अब ये क्या बात हुई गाल को चूमूँ लब नइँ या'नी हम चाय पिए वो भी बिना चीनी के
sherKuch Alfaaz
याद आई तिरे पैरों की खनकती पायल आम सा प्रश्न था संगीत किसे कहते हैं
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