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रौशनी आधी इधर आधी उधर इक दिया रक्खा है दीवारों के बीच
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@obaidullah-aleem
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Ghazal
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Nazm
रौशनी आधी इधर आधी उधर इक दिया रक्खा है दीवारों के बीच
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
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