Top 20 Sher Series

Shayari of Adil Mansuri

Shayari of Adil Mansuri ek clean reading flow me, writer aur full-detail links ke saath.

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Featured Picks

Series se pehle kuch standout sher padhein.

मेरे टूटे हौसले के पर निकलते देख कर उस ने दीवारों को अपनी और ऊँचा कर दिया

किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के

कोई ख़ुद-कुशी की तरफ़ चल दिया उदासी की मेहनत ठिकाने लगी

जो चुप-चाप रहती थी दीवार पर वो तस्वीर बातें बनाने लगी

मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ ये जब्र है कि मैं ख़ुद अपने इख़्तियार में हूँ

दरिया के किनारे पे मिरी लाश पड़ी थी और पानी की तह में वो मुझे ढूँड रहा था

नींद भी जागती रही पूरे हुए न ख़्वाब भी सुब्ह हुई ज़मीन पर रात ढली मज़ार में

सोए तो दिल में एक जहाँ जागने लगा जागे तो अपनी आँख में जाले थे ख़्वाब के

अल्लाह जाने किस पे अकड़ता था रात दिन कुछ भी नहीं था फिर भी बड़ा बद-ज़बान था

हम्माम के आईने में शब डूब रही थी सिगरेट से नए दिन का धुआँ फैल रहा था

बिस्मिल के तड़पने की अदाओं में नशा था मैं हाथ में तलवार लिए झूम रहा था

हर आँख में थी टूटते लम्हों की तिश्नगी हर जिस्म पे था वक़्त का साया पड़ा हुआ

न कोई रोक सका ख़्वाब के सफ़ीरों को उदास कर गए नींदों के राहगीरों को

लहू में उतरती रही चाँदनी बदन रात का कितना ठंडा लगा

मेरे टूटे हौसले के पर निकलते देख कर उस ने दीवारों को अपनी और ऊँचा कर दिया

किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के

कोई ख़ुद-कुशी की तरफ़ चल दिया उदासी की मेहनत ठिकाने लगी

जो चुप-चाप रहती थी दीवार पर वो तस्वीर बातें बनाने लगी

मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ ये जब्र है कि मैं ख़ुद अपने इख़्तियार में हूँ

दरिया के किनारे पे मिरी लाश पड़ी थी और पानी की तह में वो मुझे ढूँड रहा था

नींद भी जागती रही पूरे हुए न ख़्वाब भी सुब्ह हुई ज़मीन पर रात ढली मज़ार में

सोए तो दिल में एक जहाँ जागने लगा जागे तो अपनी आँख में जाले थे ख़्वाब के

अल्लाह जाने किस पे अकड़ता था रात दिन कुछ भी नहीं था फिर भी बड़ा बद-ज़बान था

हम्माम के आईने में शब डूब रही थी सिगरेट से नए दिन का धुआँ फैल रहा था

बिस्मिल के तड़पने की अदाओं में नशा था मैं हाथ में तलवार लिए झूम रहा था

हर आँख में थी टूटते लम्हों की तिश्नगी हर जिस्म पे था वक़्त का साया पड़ा हुआ

न कोई रोक सका ख़्वाब के सफ़ीरों को उदास कर गए नींदों के राहगीरों को

लहू में उतरती रही चाँदनी बदन रात का कितना ठंडा लगा

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Shayari of Adil Mansuri FAQs

Adil Mansuri Top 20 me kya milega?

Adil Mansuri ke selected sher readable cards, internal detail links, aur writer discovery ke saath milenge.

Kya is page ki links internal hain?

Haan, collection links, writer links aur detail links sab Kuch Alfaaz ke internal routes par map kiye gaye hain.

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