kab se tahal rahe hain gareban khol kar khali ghata ko kya karen barsat bhi to ho
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ख़ुद-ब-ख़ुद शाख़ लचक जाएगी फल से भरपूर तो हो लेने दो
Adil Mansuri
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ख़्वाहिश सुखाने रक्खी थी कोठे पे दोपहर अब शाम हो चली मियाँ देखो किधर गई
Adil Mansuri
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दरवाज़ा खटखटा के सितारे चले गए ख़्वाबों की शाल ओढ़ के मैं ऊँघता रहा
Adil Mansuri
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तू किस के कमरे में थी मैं तेरे कमरे में था
Adil Mansuri
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मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ ये जब्र है कि मैं ख़ुद अपने इख़्तियार में हूँ
Adil Mansuri
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