Top 20 Sher Series

Shayari of Hafeez Jalandhari

Shayari of Hafeez Jalandhari ek clean reading flow me, writer aur full-detail links ke saath.

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Featured Picks

Series se pehle kuch standout sher padhein.

इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ कहीं ऐसा न हो जाए कहीं ऐसा न हो जाए

देखा जो खा के तीर कमीं-गाह की तरफ़ अपने ही दोस्तों से मुलाक़ात हो गई

हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके तुम ने हमें भुला दिया हम न तुम्हें भुला सके

'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोली न उर्दू न हिन्दी न हिन्दोस्तानी

जिस ने इस दौर के इंसान किए हैं पैदा वही मेरा भी ख़ुदा हो मुझे मंज़ूर नहीं

मुझ से क्या हो सका वफ़ा के सिवा मुझ को मिलता भी क्या सज़ा के सिवा

मुझे तो इस ख़बर ने खो दिया है सुना है मैं कहीं पाया गया हूँ

किस मुँह से कह रहे हो हमें कुछ ग़रज़ नहीं किस मुँह से तुम ने व'अदा किया था निबाह का

अहबाब का शिकवा क्या कीजिए ख़ुद ज़ाहिर ओ बातिन एक नहीं लब ऊपर ऊपर हँसते हैं दिल अंदर अंदर रोता है

तसव्वुर में भी अब वो बे-नक़ाब आते नहीं मुझ तक क़यामत आ चुकी है लोग कहते हैं शबाब आया

ज़िंदगी फ़िरदौस-ए-गुम-गश्ता को पा सकती नहीं मौत ही आती है ये मंज़िल दिखाने के लिए

बुत-कदे से चले हो काबे को क्या मिलेगा तुम्हें ख़ुदा के सिवा

हाँ मैं तो लिए फिरता हूँ इक सजदा-ए-बेताब उन से भी तो पूछो वो ख़ुदा हैं कि नहीं हैं

अहल-ए-ज़बाँ तो हैं बहुत कोई नहीं है अहल-ए-दिल कौन तिरी तरह 'हफ़ीज़' दर्द के गीत गा सके

इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ कहीं ऐसा न हो जाए कहीं ऐसा न हो जाए

देखा जो खा के तीर कमीं-गाह की तरफ़ अपने ही दोस्तों से मुलाक़ात हो गई

हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके तुम ने हमें भुला दिया हम न तुम्हें भुला सके

'हफ़ीज़' अपनी बोली मोहब्बत की बोली न उर्दू न हिन्दी न हिन्दोस्तानी

जिस ने इस दौर के इंसान किए हैं पैदा वही मेरा भी ख़ुदा हो मुझे मंज़ूर नहीं

मुझ से क्या हो सका वफ़ा के सिवा मुझ को मिलता भी क्या सज़ा के सिवा

मुझे तो इस ख़बर ने खो दिया है सुना है मैं कहीं पाया गया हूँ

किस मुँह से कह रहे हो हमें कुछ ग़रज़ नहीं किस मुँह से तुम ने व'अदा किया था निबाह का

अहबाब का शिकवा क्या कीजिए ख़ुद ज़ाहिर ओ बातिन एक नहीं लब ऊपर ऊपर हँसते हैं दिल अंदर अंदर रोता है

तसव्वुर में भी अब वो बे-नक़ाब आते नहीं मुझ तक क़यामत आ चुकी है लोग कहते हैं शबाब आया

ज़िंदगी फ़िरदौस-ए-गुम-गश्ता को पा सकती नहीं मौत ही आती है ये मंज़िल दिखाने के लिए

बुत-कदे से चले हो काबे को क्या मिलेगा तुम्हें ख़ुदा के सिवा

हाँ मैं तो लिए फिरता हूँ इक सजदा-ए-बेताब उन से भी तो पूछो वो ख़ुदा हैं कि नहीं हैं

अहल-ए-ज़बाँ तो हैं बहुत कोई नहीं है अहल-ए-दिल कौन तिरी तरह 'हफ़ीज़' दर्द के गीत गा सके

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Shayari of Hafeez Jalandhari FAQs

Hafeez Jalandhari Top 20 me kya milega?

Hafeez Jalandhari ke selected sher readable cards, internal detail links, aur writer discovery ke saath milenge.

Kya is page ki links internal hain?

Haan, collection links, writer links aur detail links sab Kuch Alfaaz ke internal routes par map kiye gaye hain.

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