Top 20 Sher Series

Shayari of Khumar Barabankavi

Shayari of Khumar Barabankavi ek clean reading flow me, writer aur full-detail links ke saath.

Total

20

Sher

20

Featured Picks

Series se pehle kuch standout sher padhein.

भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए

वही फिर मुझे याद आने लगे हैं जिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं

ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है

मोहब्बत को समझना है तो नासेह ख़ुद मोहब्बत कर किनारे से कभी अंदाज़ा-ए-तूफ़ाँ नहीं होता

दूसरों पर अगर तब्सिरा कीजिए सामने आइना रख लिया कीजिए

अब इन हुदूद में लाया है इंतिज़ार मुझे वो आ भी जाएँ तो आए न ए'तिबार मुझे

ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं रही जज़्बात में वो पहली सी शिद्दत नहीं रही

ग़म है न अब ख़ुशी है न उम्मीद है न यास सब से नजात पाए ज़माने गुज़र गए

चराग़ों के बदले मकाँ जल रहे हैं नया है ज़माना नई रौशनी है

गुज़रे हैं मय-कदे से जो तौबा के ब'अद हम कुछ दूर आदतन भी क़दम डगमगाए हैं

ओ जाने वाले आ कि तिरे इंतिज़ार में रस्ते को घर बनाए ज़माने गुज़र गए

अक़्ल ओ दिल अपनी अपनी कहें जब 'ख़ुमार' अक़्ल की सुनिए दिल का कहा कीजिए

हाथ उठता नहीं है दिल से 'ख़ुमार' हम उन्हें किस तरह सलाम करें

झुँझलाए हैं लजाए हैं फिर मुस्कुराए हैं किस एहतिमाम से उन्हें हम याद आए हैं

भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए

वही फिर मुझे याद आने लगे हैं जिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं

ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है

मोहब्बत को समझना है तो नासेह ख़ुद मोहब्बत कर किनारे से कभी अंदाज़ा-ए-तूफ़ाँ नहीं होता

दूसरों पर अगर तब्सिरा कीजिए सामने आइना रख लिया कीजिए

अब इन हुदूद में लाया है इंतिज़ार मुझे वो आ भी जाएँ तो आए न ए'तिबार मुझे

ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं रही जज़्बात में वो पहली सी शिद्दत नहीं रही

ग़म है न अब ख़ुशी है न उम्मीद है न यास सब से नजात पाए ज़माने गुज़र गए

चराग़ों के बदले मकाँ जल रहे हैं नया है ज़माना नई रौशनी है

गुज़रे हैं मय-कदे से जो तौबा के ब'अद हम कुछ दूर आदतन भी क़दम डगमगाए हैं

ओ जाने वाले आ कि तिरे इंतिज़ार में रस्ते को घर बनाए ज़माने गुज़र गए

अक़्ल ओ दिल अपनी अपनी कहें जब 'ख़ुमार' अक़्ल की सुनिए दिल का कहा कीजिए

हाथ उठता नहीं है दिल से 'ख़ुमार' हम उन्हें किस तरह सलाम करें

झुँझलाए हैं लजाए हैं फिर मुस्कुराए हैं किस एहतिमाम से उन्हें हम याद आए हैं

You have reached the end.

Explore Similar Collections

Shayari of Khumar Barabankavi FAQs

Khumar Barabankavi Top 20 me kya milega?

Khumar Barabankavi ke selected sher readable cards, internal detail links, aur writer discovery ke saath milenge.

Kya is page ki links internal hain?

Haan, collection links, writer links aur detail links sab Kuch Alfaaz ke internal routes par map kiye gaye hain.

Collection ko kaise explore karein?

Type filter (Sher/Ghazal/Nazm), featured picks aur similar collections rail use karke fast discovery kar sakte hain.