अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
Top 20 Sher Series
Shayari of Obaidullah Aleem
Shayari of Obaidullah Aleem ek clean reading flow me, writer aur full-detail links ke saath.
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Series se pehle kuch standout sher padhein.
हवा के दोश पे रक्खे हुए चराग़ हैं हम जो बुझ गए तो हवा से शिकायतें कैसी
एक चेहरे में तो मुमकिन नहीं इतने चेहरे किस से करते जो कोई इश्क़ दोबारा करते
काश देखो कभी टूटे हुए आईनों को दिल शिकस्ता हो तो फिर अपना पराया क्या है
हज़ार तरह के सदमे उठाने वाले लोग न जाने क्या हुआ इक आन में बिखर से गए
हाए वो लोग गए चाँद से मिलने और फिर अपने ही टूटे हुए ख़्वाब उठा कर ले आए
रौशनी आधी इधर आधी उधर इक दिया रक्खा है दीवारों के बीच
ये कैसी बिछड़ने की सज़ा है आईने में चेहरा रख गया है
मैं एक से किसी मौसम में रह नहीं सकता कभी विसाल कभी हिज्र से रिहाई दे
अगर हों कच्चे घरोंदों में आदमी आबाद तो एक अब्र भी सैलाब के बराबर है
शिकस्ता-हाल सा बे-आसरा सा लगता है ये शहर दिल से ज़ियादा दुखा सा लगता है
जो आ रही है सदा ग़ौर से सुनो उस को कि इस सदा में ख़ुदा बोलता सा लगता है
दोस्तो जश्न मनाओ कि बहार आई है फूल गिरते हैं हर इक शाख़ से आँसू की तरह
खा गया इंसाँ को आशोब-ए-मआश आ गए हैं शहर बाज़ारों के बीच
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
हवा के दोश पे रक्खे हुए चराग़ हैं हम जो बुझ गए तो हवा से शिकायतें कैसी
एक चेहरे में तो मुमकिन नहीं इतने चेहरे किस से करते जो कोई इश्क़ दोबारा करते
काश देखो कभी टूटे हुए आईनों को दिल शिकस्ता हो तो फिर अपना पराया क्या है
हज़ार तरह के सदमे उठाने वाले लोग न जाने क्या हुआ इक आन में बिखर से गए
हाए वो लोग गए चाँद से मिलने और फिर अपने ही टूटे हुए ख़्वाब उठा कर ले आए
रौशनी आधी इधर आधी उधर इक दिया रक्खा है दीवारों के बीच
ये कैसी बिछड़ने की सज़ा है आईने में चेहरा रख गया है
मैं एक से किसी मौसम में रह नहीं सकता कभी विसाल कभी हिज्र से रिहाई दे
अगर हों कच्चे घरोंदों में आदमी आबाद तो एक अब्र भी सैलाब के बराबर है
शिकस्ता-हाल सा बे-आसरा सा लगता है ये शहर दिल से ज़ियादा दुखा सा लगता है
जो आ रही है सदा ग़ौर से सुनो उस को कि इस सदा में ख़ुदा बोलता सा लगता है
दोस्तो जश्न मनाओ कि बहार आई है फूल गिरते हैं हर इक शाख़ से आँसू की तरह
खा गया इंसाँ को आशोब-ए-मआश आ गए हैं शहर बाज़ारों के बीच
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Shayari of Obaidullah Aleem FAQs
Obaidullah Aleem Top 20 me kya milega?
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