ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया
Top 20 Sher Series
Shayari of Shakeel Badayuni
Shayari of Shakeel Badayuni ek clean reading flow me, writer aur full-detail links ke saath.
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Series se pehle kuch standout sher padhein.
कभी यक-ब-यक तवज्जोह कभी दफ़अतन तग़ाफ़ुल मुझे आज़मा रहा है कोई रुख़ बदल बदल कर
उन का ज़िक्र उन की तमन्ना उन की याद वक़्त कितना क़ीमती है आज कल
कैसे कह दूँ कि मुलाक़ात नहीं होती है रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती है
मुझे दोस्त कहने वाले ज़रा दोस्ती निभा दे ये मुतालबा है हक़ का कोई इल्तिजा नहीं है
मेरा अज़्म इतना बुलंद है कि पराए शोलों का डर नहीं मुझे ख़ौफ़ आतिश-ए-गुल से है ये कहीं चमन को जला न दे
मोहब्बत ही में मिलते हैं शिकायत के मज़े पैहम मोहब्बत जितनी बढ़ती है शिकायत होती जाती है
उन्हें अपने दिल की ख़बरें मिरे दिल से मिल रही हैं मैं जो उन से रूठ जाऊँ तो पयाम तक न पहुँचे
नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे
मैं नज़र से पी रहा था तो ये दिल ने बद-दुआ दी तिरा हाथ ज़िंदगी भर कभी जाम तक न पहुँचे
दिल की तरफ़ 'शकील' तवज्जोह ज़रूर हो ये घर उजड़ गया तो बसाया न जाएगा
उठा जो मीना-ब-दस्त साक़ी रही न कुछ ताब-ए-ज़ब्त बाक़ी तमाम मय-कश पुकार उठ्ठे यहाँ से पहले यहाँ से पहले
न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है नई दुनिया के रिंदों में ख़ुदा का नाम चलता है
ग़म-ए-हयात भी आग़ोश-ए-हुस्न-ए-यार में है ये वो ख़िज़ाँ है जो डूबी हुई बहार में है
ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया
कभी यक-ब-यक तवज्जोह कभी दफ़अतन तग़ाफ़ुल मुझे आज़मा रहा है कोई रुख़ बदल बदल कर
उन का ज़िक्र उन की तमन्ना उन की याद वक़्त कितना क़ीमती है आज कल
कैसे कह दूँ कि मुलाक़ात नहीं होती है रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती है
मुझे दोस्त कहने वाले ज़रा दोस्ती निभा दे ये मुतालबा है हक़ का कोई इल्तिजा नहीं है
मेरा अज़्म इतना बुलंद है कि पराए शोलों का डर नहीं मुझे ख़ौफ़ आतिश-ए-गुल से है ये कहीं चमन को जला न दे
मोहब्बत ही में मिलते हैं शिकायत के मज़े पैहम मोहब्बत जितनी बढ़ती है शिकायत होती जाती है
उन्हें अपने दिल की ख़बरें मिरे दिल से मिल रही हैं मैं जो उन से रूठ जाऊँ तो पयाम तक न पहुँचे
नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे
मैं नज़र से पी रहा था तो ये दिल ने बद-दुआ दी तिरा हाथ ज़िंदगी भर कभी जाम तक न पहुँचे
दिल की तरफ़ 'शकील' तवज्जोह ज़रूर हो ये घर उजड़ गया तो बसाया न जाएगा
उठा जो मीना-ब-दस्त साक़ी रही न कुछ ताब-ए-ज़ब्त बाक़ी तमाम मय-कश पुकार उठ्ठे यहाँ से पहले यहाँ से पहले
न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है नई दुनिया के रिंदों में ख़ुदा का नाम चलता है
ग़म-ए-हयात भी आग़ोश-ए-हुस्न-ए-यार में है ये वो ख़िज़ाँ है जो डूबी हुई बहार में है
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Shayari of Shakeel Badayuni FAQs
Shakeel Badayuni Top 20 me kya milega?
Shakeel Badayuni ke selected sher readable cards, internal detail links, aur writer discovery ke saath milenge.
Kya is page ki links internal hain?
Haan, collection links, writer links aur detail links sab Kuch Alfaaz ke internal routes par map kiye gaye hain.
Collection ko kaise explore karein?
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