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apne ehsas se chhu kar mujhe sandal kar do main ki sadiyon se adhura huun mukammal kar do na tumhen hosh rahe aur na mujhe hosh rahe is qadar tuut ke chaho mujhe pagal kar do tum hatheli ko mire pyaar ki mehndi se rango apni ankhon men mire naam ka kajal kar do is ke saae men mire khvab dahak utthenge mere chehre pe chamakta hua anchal kar do dhuup hi dhuup huun main tuut ke barso mujh par is qadar barso miri ruuh men jal-thal kar do jaise sahraon men har shaam hava chalti hai is tarah mujh men chalo aur mujhe jal-thal kar do tum chhupa lo mira dil ot men apne dil ki aur mujhe meri nigahon se bhi ojhal kar do masala huun to nigahen na churao mujh se apni chahat se tavajjoh se mujhe hal kar do apne ghham se kaho har vaqt mire saath rahe ek ehsan karo is ko musalsal kar do mujh pe chha jaao kisi aag ki surat janan aur miri zaat ko sukha hua jangal kar do apne ehsas se chhu kar mujhe sandal kar do main ki sadiyon se adhura hun mukammal kar do na tumhein hosh rahe aur na mujhe hosh rahe is qadar tut ke chaho mujhe pagal kar do tum hatheli ko mere pyar ki mehndi se rango apni aankhon mein mere nam ka kajal kar do is ke sae mein mere khwab dahak utthenge mere chehre pe chamakta hua aanchal kar do dhup hi dhup hun main tut ke barso mujh par is qadar barso meri ruh mein jal-thal kar do jaise sahraon mein har sham hawa chalti hai is tarah mujh mein chalo aur mujhe jal-thal kar do tum chhupa lo mera dil ot mein apne dil ki aur mujhe meri nigahon se bhi ojhal kar do masala hun to nigahen na churao mujh se apni chahat se tawajjoh se mujhe hal kar do apne gham se kaho har waqt mere sath rahe ek ehsan karo is ko musalsal kar do mujh pe chha jao kisi aag ki surat jaanan aur meri zat ko sukha hua jangal kar do

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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सितम ढाते हुए सोचा करोगे हमारे साथ तुम ऐसा करोगे? अँगूठी तो मुझे लौटा रहे हो अँगूठी के निशाँ का क्या करोगे? मैं तुम सेे अब झगड़ता भी नहीं हूँ तो क्या इस बात पर झगड़ा करोगे? मेरा दामन तुम्हीं था में हुए हो मेरा दामन तुम्हीं मैला करोगे बताओ वा'दा कर के आओगे ना? के पिछली बार के जैसा करोगे? वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे? मुझे बस यूँँ ही तुम सेे पूछना था अगर मैं मर गया तो क्या करोगे?

Zubair Ali Tabish

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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं

Ali Zaryoun

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो

Jaun Elia

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समुंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तिरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तुम्हारा नाम लिखने की इजाज़त छिन गई जब से कोई भी लफ़्ज़ लिखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तिरी यादों की ख़ुश्बू खिड़कियों में रक़्स करती है तिरे ग़म में सुलगता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं न जाने हो गया हूँ इस क़दर हस्सास मैं कब से किसी से बात करता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं मैं सारा दिन बहुत मसरूफ़ रहता हूँ मगर ज्यूँँ ही क़दम चौखट पे रखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं हर इक मुफ़्लिस के माथे पर अलम की दास्तानें हैं कोई चेहरा भी पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं बड़े लोगों के ऊँचे बद-नुमा और सर्द महलों को ग़रीब आँखों से तकता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं तिरे कूचे से अब मेरा तअ'ल्लुक़ वाजिबी सा है मगर जब भी गुज़रता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं हज़ारों मौसमों की हुक्मरानी है मिरे दिल पर 'वसी' मैं जब भी हँसता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं

Wasi Shah

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हज़ारों दुख पड़ें सहना मोहब्बत मर नहीं सकती है तुम से बस यही कहना मोहब्बत मर नहीं सकती तिरा हर बार मेरे ख़त को पढ़ना और रो देना मिरा हर बार लिख देना मोहब्बत मर नहीं सकती किया था हम ने कैम्पस की नदी पर इक हसीं वा'दा भले हम को पड़े मरना मोहब्बत मर नहीं सकती पुराने अहद को जब ज़िंदा करने का ख़याल आए मुझे बस इतना लिख देना मोहब्बत मर नहीं सकती वो तेरा हिज्र की शब फ़ोन रखने से ज़रा पहले बहुत रोते हुए कहना मोहब्बत मर नहीं सकती गए लम्हात फ़ुर्सत के कहाँ से ढूँड कर लाऊँ वो पहरों हाथ पर लिखना मोहब्बत मर नहीं सकती

Wasi Shah

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