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बिछड़ कर मिल रहे हैं सब, पुराने यार सालों बा'द बदल कर भी नहीं बदले, हैं ये मक्कार सालों बा'द अकेला है निपट कोई, ज़माने से कटा सा है तो कोई एक से बढ़ कर, हुआ दो-चार सालों बा'द किसी को मिल नहीं पाया, कभी इज़हार का मौक़ा अभी तक है अधूरा ही, किसी का प्यार सालों बा'द किसी में कुछ नहीं बदला, मगर हाँ ये तो बदला है मिरे सब यार अब लगते, हैं ज़िम्मेदार सालों बा'द

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चला है सिलसिला कैसा ये रातों को मनाने का तुम्हें हक़ दे दिया किस ने दियों के दिल दुखाने का इरादा छोड़िए अपनी हदों से दूर जाने का ज़माना है ज़माने की निगाहों में न आने का कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का निगाहों में कोई भी दूसरा चेहरा नहीं आया भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का ये मैं ही था बचा के ख़ुद को ले आया किनारे तक समुंदर ने बहुत मौक़ा' दिया था डूब जाने का

Waseem Barelvi

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सितम ढाते हुए सोचा करोगे हमारे साथ तुम ऐसा करोगे? अँगूठी तो मुझे लौटा रहे हो अँगूठी के निशाँ का क्या करोगे? मैं तुम सेे अब झगड़ता भी नहीं हूँ तो क्या इस बात पर झगड़ा करोगे? मेरा दामन तुम्हीं था में हुए हो मेरा दामन तुम्हीं मैला करोगे बताओ वा'दा कर के आओगे ना? के पिछली बार के जैसा करोगे? वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है कहाँ तक कार का पीछा करोगे? मुझे बस यूँँ ही तुम सेे पूछना था अगर मैं मर गया तो क्या करोगे?

Zubair Ali Tabish

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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं

Ali Zaryoun

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इक पल में इक सदी का मज़ा हम से पूछिए दो दिन की ज़िंदगी का मज़ा हम से पूछिए भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए आग़ाज़-ए-आशिक़ी का मज़ा आप जानिए अंजाम-ए-आशिक़ी का मज़ा हम से पूछिए जलते दियों में जलते घरों जैसी ज़ौ कहाँ सरकार रौशनी का मज़ा हम से पूछिए वो जान ही गए कि हमें उन सेे प्यार है आँखों की मुख़बिरी का मज़ा हम सेे पूछिए हँसने का शौक़ हम को भी था आप की तरह हँसिए मगर हँसी का मज़ा हम से पूछिए हम तौबा कर के मर गए बे-मौत ऐ 'ख़ुमार' तौहीन-ए-मय-कशी का मज़ा हम से पूछिए

Khumar Barabankvi

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उस के हाथों में जो ख़ंजर है ज़्यादा तेज है और फिर बचपन से ही उस का निशाना तेज है जब कभी उस पार जाने का ख़याल आता मुझे कोई आहिस्ता से कहता था की दरिया तेज है आज मिलना था बिछड़ जाने की निय्यत से हमें आज भी वो देर से पहुँचा है कितना तेज है अपना सब कुछ हार के लौट आए हो न मेरे पास मैं तुम्हें कहता भी रहता की दुनिया तेज है आज उस के गाल चू में हैं तो अंदाज़ा हुआ चाय अच्छी है मगर थोडा सा मीठा तेज है

Tehzeeb Hafi

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देख रहा है किस का चेहरा, आगे बढ़ मिल जाएगा तुझ को रस्ता, आगे बढ़ बैठे-बैठे केवल उतना मिलता है जितना छोड़े आगे वाला, आगे बढ़ इस रण में जय और पराजय मेरी है तू गाण्डीव उठा, कर हमला, आगे बढ़ मासूमों की भूख की क़ीमत क्या होगी दो गाली, रुपया, और ताना, आगे बढ़ भीगी आँखें, टूटा दिल और चिल्लाना सदियों का ये खेल पुराना, आगे बढ़ तूफ़ाँ, बिजली और बवंडर तो होंगे हिम्मत से बस नाव चलाना, आगे बढ़

Divy Kamaldhwaj

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दास्तान-ए-ज़िन्दगी के सिर्फ़ कुछ किरदार सच झूठ है ज़ाती मकाँ और सब किराया-दार सच ये ज़बाँ खुलती नहीं वैसे तो सबके सामने पूछता है तो बता दूँगा तुझे दो-चार सच झूठ कहना छोड़ दूँगा बस मुझे इतना बता कौन अब तक कह सका हर एक को हर बार सच जो ख़ुदा को चाहता है उस को जन्नत सच लगे और काफ़िर को तो लगता है यही संसार सच

Divy Kamaldhwaj

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राज़ जो भी था नज़र में आ गया आप का चेहरा नज़र में आ गया वक़्त आया था बुरा सो देख लो आप का लहजा नज़र में आ गया डूबने वाली थी कश्ती इश्क़ की और इक तिनका नज़र में आ गया पाक था मैं और दामन था सफ़ेद ख़ून का धब्बा नज़र में आ गया काम भी सारा किया और चुप रहे बोलने वाला नज़र में आ गया कल पिताजी हँस रहे थे और तभी पैर का छाला नज़र में आ गया

Divy Kamaldhwaj

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