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jab se tu ne mujhe divana bana rakkha hai sang har shakhs ne hathon men utha rakkha hai us ke dil par bhi kadi ishq men guzri hogi naam jis ne bhi mohabbat ka saza rakkha hai pattharo aaj mire sar pe baraste kyuun ho main ne tum ko bhi kabhi apna khuda rakkha hai ab miri diid ki duniya bhi tamashai hai tu ne kya mujh ko mohabbat men bana rakkha hai pi ja ayyam ki talkhi ko bhi hans kar 'nasir' ghham ko sahne men bhi qudrat ne maza rakkha hai jab se tu ne mujhe diwana bana rakkha hai sang har shakhs ne hathon mein utha rakkha hai us ke dil par bhi kadi ishq mein guzri hogi nam jis ne bhi mohabbat ka saza rakkha hai pattharo aaj mere sar pe baraste kyun ho main ne tum ko bhi kabhi apna khuda rakkha hai ab meri did ki duniya bhi tamashai hai tu ne kya mujh ko mohabbat mein bana rakkha hai pi ja ayyam ki talkhi ko bhi hans kar 'nasir' gham ko sahne mein bhi qudrat ne maza rakkha hai

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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है

Shabeena Adeeb

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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ़ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँँ इतने हिजाबों में मिलें आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़' जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें

Ahmad Faraz

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पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा कितना आसान था इलाज मिरा चारा-गर की नज़र बताती है हाल अच्छा नहीं है आज मिरा मैं तो रहता हूँ दश्त में मसरूफ़ क़ैस करता है काम-काज मिरा कोई कासा मदद को भेज अल्लाह मेरे बस में नहीं है ताज मिरा मैं मोहब्बत की बादशाहत हूँ मुझ पे चलता नहीं है राज मिरा

Fahmi Badayuni

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आँखों ने हाल कह दिया होंट न फिर हिला सके दिल में हज़ार ज़ख़्म थे जो न उन्हें दिखा सके घर में जो इक चराग़ था तुम ने उसे बुझा दिया कोई कभी चराग़ हम घर में न फिर जला सके शिकवा नहीं है अर्ज़ है मुमकिन अगर हो आप से दीजे मुझ को ग़म ज़रूर दिल जो मिरा उठा सके वक़्त क़रीब आ गया हाल अजीब हो गया ऐसे में तेरा नाम हम फिर भी न लब पे ला सके उस ने भुला के आप को नज़रों से भी गिरा दिया 'नासिर'-ए-ख़स्ता-हाल फिर क्यूँँ न उसे भुला सके

Hakeem Nasir

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जब से तू ने मुझे दीवाना बना रक्खा है संग हर शख़्स ने हाथों में उठा रक्खा है उस के दिल पर भी कड़ी इश्क़ में गुज़री होगी नाम जिस ने भी मोहब्बत का सज़ा रक्खा है पत्थरों आज मिरे सर पे बरसते क्यूँँ हो मैं ने तुम को भी कभी अपना ख़ुदा रक्खा है अब मिरी दीद की दुनिया भी तमाशाई है तू ने क्या मुझ को मोहब्बत में बना रक्खा है पी जा अय्याम की तल्ख़ी को भी हँस कर 'नासिर' ग़म को सहने में भी क़ुदरत ने मज़ा रक्खा है

Hakeem Nasir

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