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kitni sharmili lajili hai hava barsat ki milti hai un ki ada se har ada barsat ki jaane kis mahival se aati hai milne ke liye sohni gaati hui saundhi hava barsat ki us ke ghar bhi tujh ko aana chahiye tha ai bahar jis ne sab ke vaste mangi dua barsat ki ab ki barish men na rah jaae kisi ke dil men mail sab ki gagri dho ke bhar de ai ghata barsat ki dekhiye kuchh aise bhi bimar hain barsat ke botalon men le ke nikle hain dava barsat ki jeb apni dekh kar mausam se yaari kijiye ab ki mahngi hai bahut ab-o-hava barsat ki badalon ki ghan-garaj ko sun ke bachche ki tarah chaunk chaunk uthti hai rah rah kar faza barsat ki raste men tum agar bhige to khafgi mujh pe kyuun mere munsif pe khata meri hai ya barsat ki ham to barish men khuli chhat par na soenge 'nazir' aap tanha apne sar liije bala barsat ki kitni sharmili lajili hai hawa barsat ki milti hai un ki ada se har ada barsat ki jaane kis mahiwal se aati hai milne ke liye sohni gati hui saundhi hawa barsat ki us ke ghar bhi tujh ko aana chahiye tha ai bahaar jis ne sab ke waste mangi dua barsat ki ab ki barish mein na rah jae kisi ke dil mein mail sab ki gagri dho ke bhar de ai ghata barsat ki dekhiye kuchh aise bhi bimar hain barsat ke botalon mein le ke nikle hain dawa barsat ki jeb apni dekh kar mausam se yari kijiye ab ki mahngi hai bahut aab-o-hawa barsat ki baadalon ki ghan-garaj ko sun ke bachche ki tarah chaunk chaunk uthti hai rah rah kar faza barsat ki raste mein tum agar bhige to khafgi mujh pe kyun mere munsif pe khata meri hai ya barsat ki hum to barish mein khuli chhat par na soenge 'nazir' aap tanha apne sar lije bala barsat ki

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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है

Shabeena Adeeb

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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ़ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँँ इतने हिजाबों में मिलें आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़' जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें

Ahmad Faraz

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उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है नई 'उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है

Waseem Barelvi

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कितनी शर्मीली लजीली है हवा बरसात की मिलती है उन की अदास हर अदा बरसात की जाने किस महिवाल से आती है मिलने के लिए सोहनी गाती हुई सौंधी हवा बरसात की उस के घर भी तुझ को आना चाहिए था ऐ बहार जिस ने सब के वास्ते माँगी दुआ बरसात की अब की बारिश में न रह जाए किसी के दिल में मैल सब की गगरी धो के भर दे ऐ घटा बरसात की देखिए कुछ ऐसे भी बीमार हैं बरसात के बोतलों में ले के निकले हैं दवा बरसात की जेब अपनी देख कर मौसम से यारी कीजिए अब की महँगी है बहुत आब-ओ-हवा बरसात की बादलों की घन-गरज को सुन के बच्चे की तरह चौंक चौंक उठती है रह रह कर फ़ज़ा बरसात की रास्ते में तुम अगर भीगे तो ख़फ़गी मुझ पे क्यूँँ मेरे मुंसिफ़ पे ख़ता मेरी है या बरसात की हम तो बारिश में खुली छत पर न सोएँगे 'नज़ीर' आप तन्हा अपने सर लीजे बला बरसात की देखिए कुछ ऐसे भी बीमार हैं बरसात के बोतलों में ले के निकले हैं दवा बरसात की जेब अपनी देख कर मौसम से यारी कीजिए अब की महँगी है बहुत आब-ओ-हवा बरसात की बादलों की घन-गरज को सुन के बच्चे की तरह चौंक चौंक उठती है रह रह कर फ़ज़ा बरसात की रास्ते में तुम अगर भीगे तो ख़फ़गी मुझ पे क्यूँँ मेरे मुंसिफ़ पे ख़ता मेरी है या बरसात की हम तो बारिश में खुली छत पर न सोएँगे 'नज़ीर' आप तन्हा अपने सर लीजे बला बरसात की

Nazeer Banarasi

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कभी ख़ामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे, मैं उतना याद आऊँगा मुझे जितना भुलाओगे। कोई जब पूछ बैठेगा ख़ामोशी का सबब तुम सेे, बहुत समझाना चाहोगे मगर समझा न पाओगे। कभी दुनिया मुकम्मल बन के आएगी निगाहों में, कभी मेरे कभी दुनिया की हर एक शह में पाओगे। कहीं पर भी रहें हम तुम मोहब्बत फिर मोहब्बत है, तुम्हें हम याद आएँगे हमें तुम याद आओगे।

Nazeer Banarasi

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