نہ کر کس پر زبردستی نہ کس کا دل دوکھانا ہے یتی کیا مال پرستی خدا کوں موں دیکھانا ہے تکبر کے جو مسند پر غروری کا جو تکیہ دھر رہا کیا بیٹھ غفلت کر تجھے دنیا تھے جانا ہے نکر توں مردم آزاری تجھے مرنا ہے سوں ساری عذاباں قبر ہے بھاری تجھے بھی واں سمانا ہے کفن سے کھول مکھ تیرا لگا کر لیا ہے تربت سیں کریں سب مل دفن تجکوں دنیا کا کیا بہانا ہے اجل جس وقت آوے گا مرے گا کن عذابوں سیں اندہارے گور میں تجکوں دنیا کا کیا بہانا ہے پوچھے منکر نیکر تجکوں نہ نکلے جواب تجھ مکھ سیں اوسے دہشت کے لرزے سیں زباں تب لٹ پٹانا ہے خدا قاضی جو ہوے گا محمد پیشوا ہو کر تیری نیکی بدی دونوں ترازو میں تولانا ہے ہوجاوے خاک گل در گل رہے ماتی سوں ماتی مل نکو لیوے نام کئی یک تل کیں اخر زمانا ہے قبر میں رکھ تجھے جیوں کوں چلے سب چھوڑ کر گھر کوں کہ یارب تم نکو چھورو جو یو بے کس بے زبانا ہے
Related Ghazal
ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
355 likes
मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता
Tehzeeb Hafi
456 likes
क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
Javed Akhtar
371 likes
कभी मिलेंगे तो ये कर्ज़ भी उतारेंगे तुम्हारे चेहरे को पहरों तलक निहारेंगे ये क्या सितम कि खिलाड़ी बदल दिया उस ने हम इस उमीद पे बैठे थे हम ही हारेंगे हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
70 likes
तेरे पीछे होगी दुनिया पागल बन क्या बोला मैं ने कुछ समझा? पागल बन सहरा में भी ढूँढ़ ले दरिया पागल बन वरना मर जाएगा प्यासा पागल बन आधा दाना आधा पागल नइँ नइँ नइँ उस को पाना है तो पूरा पागल बन दानाई दिखलाने से कुछ हासिल नहीं पागल खाना है ये दुनिया पागल बन देखें तुझ को लोग तो पागल हो जाएँ इतना उम्दा इतना आला पागल बन लोगों से डर लगता है तो घर में बैठ जिगरा है तो मेरे जैसा पागल बन
Varun Anand
81 likes
Similar Writers
Our suggestions based on عبدالقادر قادر بیجاپوری.
Similar Moods
More moods that pair well with عبدالقادر قادر بیجاپوری's ghazal.







