tumhari anjuman se uth ke divane kahan jaate jo vabasta hue tum se vo afsane kahan jaate departing from your company, where could your lovers go? what would happen to those legends that around you grow? nikal kar dair-o-kaaba se agar milta na mai-khana to thukrae hue insan khuda jaane kahan jaate if on leaving temple,mosque no tavern were be found what refuge would outcasts find? this only god would know tumhari be-rukhi ne laaj rakh li bada-khane ki tum ankhon se pila dete to paimane kahan jaate your indifference has managed to preserve the tavern's name had we feasted from your eyes, what then would wine bestow? chalo achchha hua kaam aa gai divangi apni vagarna ham zamane bhar ko samjhane kahan jaate twas a good thing that my madness was to some avail else, for my state, what other reason could the world i show? 'qatil' apna muqaddar ghham se begana agar hota to phir apne parae ham se pahchane kahan jaate had pain and misery been strangers to my life somehow how would then i know the difference between friend and foe tumhaari anjuman se uth ke diwane kahan jate jo wabasta hue tum se wo afsane kahan jate departing from your company, where could your lovers go? what would happen to those legends that around you grow? nikal kar dair-o-kaba se agar milta na mai-khana to thukrae hue insan khuda jaane kahan jate if on leaving temple,mosque no tavern were be found what refuge would outcasts find? this only god would know tumhaari be-rukhi ne laj rakh li baada-khane ki tum aankhon se pila dete to paimane kahan jate your indifference has managed to preserve the tavern's name had we feasted from your eyes, what then would wine bestow? chalo achchha hua kaam aa gai diwangi apni wagarna hum zamane bhar ko samjhane kahan jate twas a good thing that my madness was to some avail else, for my state, what other reason could the world i show? 'qatil' apna muqaddar gham se begana agar hota to phir apne parae hum se pahchane kahan jate had pain and misery been strangers to my life somehow how would then i know the difference between friend and foe
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क्या करोगे मेरा जादू चल गया तो हफ़्ते भर में उस को पागल कर दिया तो बोलना अगली दफ़ा तलवार उठेगी ग़लती से भी उस के ऊपर हाथ उठा तो बद्दुआऍं मरने की दे तो रही हो और कहीं मैं सच में इस से मर गया तो जी मुझे दरअस्ल अच्छे लगते हो आप उस ने मेरी बात सुन कर के कहा तो
Kushal Dauneria
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क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता तू छोड़ रहा है तो ख़ता इस में तिरी क्या हर शख़्स मिरा साथ निभा भी नहीं सकता प्यासे रहे जाते हैं ज़माने के सवालात किस के लिए ज़िंदा हूँ बता भी नहीं सकता घर ढूँड रहे हैं मिरा रातों के पुजारी मैं हूँ कि चराग़ों को बुझा भी नहीं सकता वैसे तो इक आँसू ही बहा कर मुझे ले जाए ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता
Waseem Barelvi
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पानी की चोट चोट है कच्चे घड़ों से पूछ कम उम्र में बियाही गई लड़कियों से पूछ किस किस से तेरे बारे में पूछा नहीं बता जा डाकियों से पूछ जा कंडक्टरों से पूछ ये हिज्र कैसे काटता है आदमी की उम्र नदियों से कटने वाले बड़े पर्वतों से पूछ कैसे जुदा किया है उसे कैसे ख़ुश रहें बरसे बग़ैर जाते हुए बादलों से पूछ
Rishabh Sharma
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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं
Ali Zaryoun
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मेरे दिल में ये तेरे सिवा कौन है? तू नहीं है तो तेरी जगह कौन है? हम मोहब्बत में हारे हुए लोग हैं और मोहब्बत में जीता हुआ कौन है? मेरे पहलू से उठ के गया कौन है? तू नहीं है तो तेरी जगह कौन है? तू ने जाते हुए ये बताया नहीं मैं तेरा कौन हूँ तू मेरा कौन है
Tehzeeb Hafi
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तितलियों का रंग हो या झूमते बादल का रंग हम ने हर इक रंग को जाना तिरे आँचल का रंग तेरी आँखों की चमक है या सितारों की ज़िया रात का है घुप अँधेरा या तिरे काजल का रंग धड़कनों के ताल पर वो हाल अपने दिल का है जैसे गोरी के थिरकते पाँव में पायल का रंग फेंकना तुम सोच कर लफ़्ज़ों का ये कड़वा गुलाल फैल जाता है कभी सदियों पे भी इक पल का रंग आह ये रंगीन मौसम ख़ून की बरसात का छा रहा है अक़्ल पर जज़्बात की हलचल का रंग अब तो शबनम का हर इक मोती है कंकर की तरह हाँ उसी गुलशन पे छाया था कभी मख़मल का रंग फिर रहे हैं लोग हाथों में लिए ख़ंजर खुले कूचे कूचे में अब आता है नज़र मक़्तल का रंग चार जानिब जिस की रा'नाई के चर्चे हैं 'क़तील' जाने कब देखेंगे हम उस आने वाली कल का रंग
Qateel Shifai
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अपने होंटों पर सजाना चाहता हूँ आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ कोई आँसू तेरे दामन पर गिरा कर बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ थक गया मैं करते करते याद तुझ को अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ छा रहा है सारी बस्ती में अँधेरा रौशनी को, घर जलाना चाहता हूँ आख़िरी हिचकी तिरे ज़ानू पे आए मौत भी मैं शाइराना चाहता हूँ
Qateel Shifai
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खुला है झूट का बाज़ार आओ सच बोलें न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें सुकूत छाया है इंसानियत की क़द्रों पर यही है मौक़ा-ए-इज़हार आओ सच बोलें हमें गवाह बनाया है वक़्त ने अपना ब-नाम-ए-अज़्मत-ए-किरदार आओ सच बोलें सुना है वक़्त का हाकिम बड़ा ही मुंसिफ़ है पुकार कर सर-ए-दरबार आओ सच बोलें तमाम शहर में क्या एक भी नहीं मंसूर कहेंगे क्या रसन-ओ-दार आओ सच बोलें बजा कि ख़ू-ए-वफ़ा एक भी हसीं में नहीं कहाँ के हम भी वफ़ादार आओ सच बोलें जो वस्फ़ हम में नहीं क्यूँँ करें किसी में तलाश अगर ज़मीर है बेदार आओ सच बोलें छुपाए से कहीं छुपते हैं दाग़ चेहरे के नज़र है आइना-बरदार आओ सच बोलें 'क़तील' जिन पे सदा पत्थरों को प्यार आया किधर गए वो गुनहगार आओ सच बोलें
Qateel Shifai
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राब्ता लाख सही क़ाफ़िला-सालार के साथ हम को चलना है मगर वक़्त की रफ़्तार के साथ ग़म लगे रहते हैं हर आन ख़ुशी के पीछे दुश्मनी धूप की है साया-ए-दीवार के साथ किस तरह अपनी मोहब्बत की मैं तकमील करूँँ ग़म-ए-हस्ती भी तो शामिल है ग़म-ए-यार के साथ लफ़्ज़ चुनता हूँ तो मफ़्हूम बदल जाता है इक न इक ख़ौफ़ भी है जुरअत-ए-इज़हार के साथ दुश्मनी मुझ से किए जा मगर अपना बन कर जान ले ले मिरी सय्याद मगर प्यार के साथ दो घड़ी आओ मिल आएँ किसी 'ग़ालिब' से 'क़तील' हज़रत 'ज़ौक़' तो वाबस्ता हैं दरबार के साथ
Qateel Shifai
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परेशां रात सारी है सितारो तुम तो सो जाओ सुकूत-ए-मर्ग तारी है सितारो तुम तो सो जाओ हंसो और हंसते-हंसते डूबते जाओ ख़लाओं में हमीं पे रात भारी है सितारो तुम तो सो जाओ हमें तो आज की शब पौ फटे तक जागना होगा यही क़िस्मत हमारी है सितारो तुम तो सो जाओ तुम्हें क्या आज भी कोई अगर मिलने नहीं आया ये बाज़ी हम ने हारी है सितारो तुम तो सो जाओ कहे जाते हो रो रो कर हमारा हाल दुनिया से ये कैसी राज़दारी है सितारो तुम तो सो जाओ हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगे अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ
Qateel Shifai
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