कुछ कहना है और कुछ न कहे चले जाना ये कब तक चलेगा तुम्हारा हम पर यूँँ मर मर के जिए जाना ऐसा कब तक चलेगा ये जो तुम नए बहानों से हमें देखने आते हो सब समझ आता है हम तुम्हें देख लें और तुम्हारा बे-साख़्ता मुँह फेर जाना ऐसा कब तक चलेगा लो आ गए तुम्हारे दोस्त फिर क़ासिद बन आशिक़ का हाल बुरा है इन का ये मुझे बताए जाना ऐसा कब तक चलेगा मैं ने तो कभी नहीं रोका तुम्हें मेरा हाथ थामने से तुम्हारा हर रोज़ इतने क़रीब से गुज़र जाना ऐसा कब तक चलेगा नहीं जानते तुम्हारी क्या है हसरत तो ये जान-बूझ कर शा'इरी में अपनी सब कहे जाना ऐसा कब तक चलेगा तुम से नहीं होता तो एक क़दम मैं ही आगे बढ़ाती हूँ 'गीत' अब तेरा ये एक क़दम आगे बढ़ा दो पीछे हो जाना ऐसा कब तक चलेगा
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तुम हमारे लिए तुम हमारे लिए अर्चना बन गई हम तुम्हारे लिए एक दर्पण प्रिये तुम मिलो तो सही हाल पूछो मेरा हम न रो दें तो कह देना पत्थर प्रिये प्यार मिलना नहीं था अगर भाग्य में देवताओं ने हम सेे ये छल क्यूँ किया मेरे दिल में भरी रेत ही रेत थी दे के अमृत ये हम को विकल क्यूँ किया अप्सरा हो तो हो पर हमारे लिए तुम ही सुंदर सुकोमल सुघर हो प्रिये देवताओं के गणितीय संसार में ऐसा भी है नहीं कोई अच्छा न था हम अगर इस जनम भी नहीं मिल सके सब कहेंगे यही प्यार सच्चा न था कायरों को कभी प्यार मिलता नहीं फ़ैसला कोई ले लो कि डटकर प्रिये मम्मी कहती थीं चंदा बहुत दूर है चाँद से आगे हम को सितारा लगा यूँँ तो चेहरे ही चेहरे थे दुनिया में पर एक तेरा ही चेहरा पियारा लगा पलकों पे मेरी रख कर क़दम तुम चलो पॉंव में चुभ न जाए कि कंकड़ प्रिये
Rakesh Mahadiuree
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"जज़्बात" जो ये आँखों से बह रहा है कितने हम लाचार है तुम समझो तो इंतिज़ार है वरना कोई इंतिज़ार नहीं तुम्हारी याद में ऐसे डूबा जैसे कोई बीमार है तुम समझो तो बे-क़रार है वरना कोई बे-क़रार नहीं जो मेरी धड़कन चल रही है इन में बस तुम्हारा नाम है तुम समझो तो ये पुकार है वरना कोई पुकार नहीं इन हाथो से तुम्हारी ज़ुल्फ़ें सँवारनी हैं हर शाम तुम्हारे साथ गुज़ारनी है तुम समझो तो ये दुलार है वरना कोई दुलार नहीं तुम्हारे बस दिल में जगह नहीं तुम्हारी रूह से रिश्ता चाहिए तुम समझो तो ये आर-पार है वरना कुछ आर-पार नहीं तुम्हें मिल तो जाएगा मुझ सेे अच्छा सामने तुम्हारे तो क़तार है तुम्हें पता है ना तुम्हारी चाहत का बस एक हक़दार है बाकी कोई हक़दार नहीं तुम्हारी बाँहों में ही सुकून मिलेगा मुझे सच कहूँ तो दरकार है तुम समझो तो ये बहार है वरना कहीं बहार नहीं तुम्हारी गोद में आराम चाहिए तुम्हारी आवाज़ में बस अपना नाम चाहिए तुम समझो तो ये क़रार है वरना कोई क़रार नहीं तुम हो जो मेरे जीवन का तुम नहीं तो सब बेज़ार है तुम समझो तो ये आधार है वरना कोई आधार नहीं काश तुम भी हम सेे इक़रार करते चाहत की बरसात मूसला-धार करते मैं तुम सेे बेहद करता और तुम बेहद की भी हद पार करते तुम समझो तो इन सब के आसार हैं वरना कोई आसार नहीं अगर तुम कोशिश करते तो पता चलता की तुम हो तो घर-बार है तुम से ही मेरा संसार है वरना कोई संसार नहीं बिन तेरे ज़िन्दगी तो रहेगी काट लेंगे तुम्हारे बिना तुम समझो तो जीने का विचार है वरना कोई विचार नहीं ये दुनिया भले कुछ भी बोले तुम मेरी नहीं तो क्या मैं तुम्हारा तो हूँ ना यही मेरा इज़हार है अगर तुम समझो तो ये प्यार है वरना कोई प्यार नहीं
Divya 'Kumar Sahab'
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"मेरी दास्ताँ" वो दिन भी कितने अजीब थे जब हम दोनों क़रीब थे शबब-ए-हिज़्र न तू, न मैं सब अपने-अपने नसीब थे तू ही मेरी दुनिया थी मैं ही तेरा जहान था मुझे तेरे होने का ग़ुरूर था तुझे मेरे होने पर गुमान था तेरे साथ बिताए थे वो दिन वो राते कितनी हसीन थी उस कमरे में थी जन्नत सारी एक बिस्तर पर ही जमीन थी तेरी गोद में सर रख कर मैं गज़ले अपनी सुनाता था तू सुन कर शा'इरी सो जाती थी, मैं तेरी ख़ुशबू में खो जाता था मेरी कामयाबी की ख़बरें सुन मुझ सेे ज़्यादा झूमा करती थी वो बेवजह बातों-बातों में मेरा माथा चूमा करती थी मेरी हर परेशानी में वो मेरी हमदर्द थी,हम सेाया थी उस से बढ़कर कुछ न था बस वही एक सर्माया थी मुलाक़ात न हो तो कहती थी मैं कैसे आज सो पाऊंगी मुझे गले लगा कर कहती थी मैं तुम सेे जुदा ना हो पाऊंगी इक आईना थी वो मेरा उस सेे कुछ भी नहीं छुपा था हर चीज जानती थी मेरी मेरा सब कुछ उसे पता था यार वही चेहरे हैं अपने वही एहसास दिल में है फिर क्यूँ दूरियाँ बढ़ सी गई क्यूँ रिश्ते आज मुश्किल में है कई सवाल हैं दिल में एक-एक कर के सब सुनोगी क्या? मैं शुरू करता हूँ शुरू से अब सबका जवाब दोगी क्या क्यूँ लौटा दी अंगुठी मुझे? क्यूँ बदल गए सब इरादे तेरे? क्या हुआ तेरी सब क़समों का? अब कहाँ गए सब वादे तेरे? तेरे इन मेहंदी वाले हाथों में किसी ओर का अब नाम हैं इक हादसा हैं मेरे लिए ये माना तेरे लिए ईनाम हैं अपने हिज्र की वो पहली रात तब ख़याल तो मेरा आया होगा आई होगी सब यादें पुरानी मेरी बातों ने भी रुलाया होगा जैसे मुझ में कोई चीख रहा हैं मेरी रूह-रूह तक सो रही हैं मैं अपनी दास्तां लिख रहा हूँ और मेरी शा'इरी रो रही हैं बस यही इल्तिजा हैं ख़ुदा से कोई इतना भी प्यारा न बने कई सूरतें हो सामने नज़र के पर कोई हमारा ना बने
"Nadeem khan' Kaavish"
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मेरा संसार मेरे मन का सुकून भी तुम हो, तुम ही मेरी मंज़िल उस का जुनून भी तुम हो, मेरा दिन भी तुम हो, मेरी रात भी तुम हो, मेरी नींद भी तुम हो, मेरे जज़्बात भी तुम हो, मेरा हर लम्हा तुम हो, मेरे हालात भी तुम हो, मेरा जीवन भी तुम हो, इस की मस्ती भी तुम हो, हूँ अगर मैं मँझधार तो, फिर इस की कश्ती भी तुम हो, अगर हूँ मैं शरीर तो, इस की अस्थि भी तुम हो, और हूँ अगर मैं आत्मा तो, इस की मुक्ति भी तुम हो, मेरा वैराग्य भी तुम हो, मेरी आसक्ति भी तुम हो, मेरा ईश्वर भी तुम हो, मेरी भक्ति भी तुम हो, मैं अगर दिल हूँ तो, इस की धड़कन भी तुम हो, मेरी हर बात तुम हो, मेरी तड़पन भी तुम हो, मेरी स्वतंत्रता भी तुम हो, मेरा बंधन भी तुम हो, मेरा सुख भी तुम हो, मेरी मुस्कान भी तुम हो, मेरा दुख भी तुम हो, मेरा सम्मान भी तुम हो, मेरा बल भी तुम हो, मेरा स्वाभिमान भी तुम हो, मेरी प्रार्थना भी तुम हो, मेरा अभिमान भी तुम हो, मेरा हर काम भी तुम हो, थक जाऊँ तो आराम भी तुम हो, भेजे हैं तुझ को चाँद के हाथों, वो सारे पैग़ाम भी तुम हो, साँसों में बस तेरा नाम है, मेरा तो अंजाम भी तुम हो, मेरा तो आधार ही तुम हो, मेरी तो सरकार ही तुम हो, मेरी तो फ़कीरी भी तुम हो, ख़ज़ाने का अंबार भी तुम हो, मेरे लबों का मौन भी तुम हो, मेरे दिल की पुकार भी तुम हो, मेरी तो कुटिया भी तुम हो, मेरा राज-दरबार भी तुम हो, मेरा हर विकार भी तुम हो, मेरा तो श्रृंगार भी तुम हो, मेरी जीत-हार भी तुम हो, मेरा गुस्सा-प्यार भी तुम हो, मेरा तो घर बार ही तुम हो, जीने के आसार ही तुम हो, कैसे मैं बताऊ तुझे, तुम्हारे बिन मैं कुछ भी नहीं, मेरा तो संसार ही तुम हो, मेरा तो संसार ही तुम हो, मेरा तो संसार ही तुम हो।
Divya 'Kumar Sahab'
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"उस की ख़ुशियाँ" सारी झीलें सूख गई हैं उस की आँखें सूख गई हैं पेड़ों पर पंछी भी चुप हैं उस को कोई दुख है शायद रस्ते सूने सूने हैं सब उस ने टहलना छोड़ दिया है सारी ग़ज़लें बेमानी हैं उस ने पढ़ना छोड़ दिया है वो भी हँसना भूल चुकी है गुलों ने खिलना छोड़ दिया है सावन का मौसम जारी है या'नी उस का ग़म जारी है बाक़ी मौसम टाल दिए हैं सुख कूएँ में डाल दिए हैं चाँद को छुट्टी दे दी गई है तारों को मद्धम रक्खा है आतिश-दान में फेंक दी ख़ुशियाँ दिल में बस इक ग़म रक्खा है खाना पीना छोड़ दिया है सब सेे रिश्ता तोड़ दिया है हाए क़यामत आने को है उस ने जीना छोड़ दिया है हर दिल ख़ुश हर चेहरा ख़ुश हो वो हो ख़ुश तो दुनिया ख़ुश हो वो अच्छी तो सब अच्छा है और दुनिया में क्या रक्खा है ये सब सुन कर ख़ुदा ने बोला बोल तेरी अब ख़्वाहिश क्या है मैं ने बोला मेरी ख़्वाहिश मेरी ख़्वाहिश उस की ख़ुशियाँ ख़ुदा ने बोला तेरी ख़्वाहिश मैं फिर बोला उस की ख़ुशियाँ इस के अलावा पूछ रहा हूँ मैं ने बोला उस की ख़ुशियाँ अपने लिए कुछ माँग ले पगले माँग लिया ना उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ
Varun Anand
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आज के दिन जो अपने डर का इज़हार किया तो कि मैं तो अपना लूँ उसे मौत ने इनकार किया तो वो कच्ची सी उम्र वो पक्का सा हादिसा इक काँच का महल आज संगसार किया तो इक रूप बाहर इक है पीछे और इक उन के बीच मैं ने ग़लत से प्यार किया तो दिल पर रख पत्थर या हो पत्थर दिल हू-ब-हू उन की तरह उन पय वार किया तो कि रुकती हैं साँसें लो रोक दी गईं फिर भी सोचा जाए तेरा इंतिज़ार किया तो
Geetanjali Geet
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सच्चा झूठा झूठा सच्चा वा'दा इक नादान का है जलते जलते राख हुआ मेरा मकाँ इम्कान सा है पत्ते टहनी शजर जो टूटे मसअला ये तूफ़ान का है रेत रेत बन उड़ता जाए वो जो कहे चट्टान सा है नदी परिंदे अंबर बोले सुनना उस की ज़बान का है सुना मैं ने दो बार सुना तीसरा इक गुमान सा है खेल नफ़रत का ठीक नहीं वो तेरे ही ज़ियान का है धर्म मोहब्बत जो अपनाए वो इंसान इंसान सा है
Geetanjali Geet
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किसी ने कहा कैसी पत्थर दिल है तू क्या ये कब हुआ नहीं तो इस दिल पर कुछ लगे चीख़ उठता है रोता है ख़ून बहाता है यक़ीनन पत्थर तो ऐसा नहीं करता या पत्थर की तबीअ'त में भी बदलाव आया है बदलाव उस मौसम की तरह बदलाव उस की बातों की तरह बदलाव उस मुक़फ़्फ़ल पड़े घर की तरह जो कभी झूमता था इक परिवार के होने से बदलाव जो इक रोते शख़्स को हँसा दे और हँसते को रुला दे बदलाव इस बदलाओ की तरह जो सब बदल दे ये कैसा बदलाव पत्थर पत्थर ही है या बदल गया मेरा दिल दिल ही है या बदल गया कोई तो है जो बदल गया मैं मैं ही हूँ या
Geetanjali Geet
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चले चले जाते हैं क़दम नज़रें मिलीं रुक जाते हैं क़दम मंज़िल ना दिखे मुड़ जाते हैं क़दम मंज़िल जो दिखे जुड़ जाते हैं क़दम सफ़र करते पैहम थक जाते हैं क़दम कुछ नोकीला चुभ जाए रो जाते हैं क़दम उस के पास आने से पीछे जाते हैं क़दम शर्म क्यूँ इतनी कर जाते हैं क़दम देख बैठ यहाँ से कहाँ जाते हैं क़दम वापस आते हैं या भटक जाते हैं क़दम ग़लत बहुत ग़ुस्से में उठ जाते हैं क़दम मिले जो सुर-ओ-ताल बहल जाते हैं क़दम वक़्त से तेज़ जाए जाते हैं क़दम वक़्त जो आए मर जाते हैं क़दम
Geetanjali Geet
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दर्द लिखा है अच्छा लिक्खा है दिल पर जो बीती वो कोई बात नहीं टूट कर लिखने लगी अच्छा लिखने लगी मोहब्बत है मुझ से वो कोई बात नहीं ख़ुश हूँ मैं ये क्या लिक्खा है लिखा है रो कर वो कोई बात नहीं आबाद हूँ मैं ये क्या लिक्खा है हाँ लिखा बर्बाद हो कर वो कोई बात नहीं चलते चलते थक गई अच्छा लिखा है पैहम मुझे पुकारती रही वो कोई बात नहीं हसरतें मरती चली गईं अच्छा लिखा है क़ातिल मैं हूँ ख़ैर वो कोई बात नहीं ख़ामोश सी हो गई हूँ ये क्या लिखा है क़ज़ा की अलामत है वो कोई बात नहीं जा रही हूँ ये क्या लिखा है अच्छा तो चली गई वो कोई बात नहीं
Geetanjali Geet
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