nazmKuch Alfaaz

‘दिवाना’ तुम्हें कुछ पता भी है कोई तुम्हें देख कर जी रहा है ख़बर है किसी को इबादत सी लगने लगी हो है मालूम कुछ कौन है वो कि जिस की तुम्हीं पर नज़र है ये मानो तुम्हारा दिवाना है जिस की तुम्हारे ख़यालों में कटती हैं रातें तुम्हारी ही करता है हर वक़्त बातें वो लड़का मगर पहले ऐसा नहीं था किसी की अदाओं पे क़ातिल निगाहों पे ज़ुल्फ़ों की बादल सी दिलकश घटाओं पे मरता नहीं था किसी से मोहब्बत ही करता नहीं था पर अब जब से तुम आ गई हो अजब सा नशा इक हुआ है वो अब मुस्कुराने लगा है उसे ज़िंदगी भा गई है मोहब्बत भी रास आ गई है

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वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे जो इश्क़ को काम समझते थे या काम से आशिक़ी करते थे हम जीते-जी मसरूफ़ रहे कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया काम इश्क़ के आड़े आता रहा और इश्क़ से काम उलझता रहा फिर आख़िर तंग आ कर हम ने दोनों को अधूरा छोड़ दिया

Faiz Ahmad Faiz

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तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से

Zubair Ali Tabish

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मैं सिगरेट तो नहीं पीता मगर हर आने वाले से पूछ लेता हूँ कि "माचिस है?" बहुत कुछ है जिसे मैं फूँक देना चाहता हूँ.

Gulzar

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"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है

Ali Zaryoun

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मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

Sahir Ludhianvi

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"भूल जाऊँगा?" मोहब्बत के सारे सितम भूल जाऊँगा? बे-असर से ज़ख़्मों के मरहम भूल जाऊँगा? माना टूटा हूँ पर तू ने सोचा भी कैसे के तुझ को मैं मेरे सनम भूल जाऊँगा तेरा लहरों सा चलना ज़ेहन में बसा है उन आँखों की कैसे शरम भूल जाऊँगा? चलो ना होश रहा के शुरुआत कैसे हुई कैसे कब हुआ मैं ख़तम भूल जाऊँगा माना टूटा हूँ पर तू ने सोचा भी कैसे तेरी पायल का शोर जैसे शहनाई कोई जो पाक़ लगे वो क़दम भूल जाऊँगा? वो सादग़ी तेरी जो नज़रें तक ना मिलीं हँसकर सह गया जो मैं ग़म भूल जाऊँगा? माना टूटा हूँ पर तू ने सोचा भी कैसे हम जुदा नहीं बस फ़ासले दौरानियाँ हैं तुझे याद कर हर जनम भूल जाऊँगा? प्यार मिलता नहीं जीते जी ये सुना है मैं बेहोशी में ये भरम भूल जाऊँगा माना टूटा हूँ पर तू ने सोचा भी कैसे

Rohit tewatia 'Ishq'

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"नादान परी" वो मेरी नादान परी सब सेे छिपकर रहती थी अक्सर मुझ सेे कहती थी छोड़ो प्यार व्यार की बातें हिस्से आती तन्हा रातें इस सेे क्या ही मिल पाएगा जो है वो भी ख़ो जाएगा मैं ने सोचा सच ही तो है प्यार किसे ही मिल पाया है इस को तो एहसास दिला दूँ दुनिया से भी मैं लड़ लूँगा क़िस्मत से कैसे जीतूँगा मैं तो ये ग़म पाल ही लूँगा टूटा दिल सँभाल ही लूँगा वो तो सचमुच मर जाएगी और फिर कुछ ना कर पाएगी उस को एक जीवन जीना है मुझ को हर आँसू पीना है वैसे भी क्या ही है मुझ में मेरे जैसे कितने होंगे मेरे होने से क्या होगा बस इक गिनती बढ़ जाएगी उस के आगे अड़ जाएगी मेरा जाना ही बेहतर है साँस ही लेनी है ले लूँगा जान ही देनी है दे दूँगा जान तो वैसे भी उस की है उस को कहाँ मालूम है इतना वो मेरी नादान परी

Rohit tewatia 'Ishq'

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"क़िस्मत" कभी सोचता हूँ मेरा हक़ है उस पर वही जो किसी और की हो चुकी है वो लड़की जो क़िस्मत में मेरे लिखी थी लकीरों से मेरी कहीं खो चुकी है कभी सोचता हूँ बहुत सोचता हूँ मगर अब करूँँ तो करूँँ क्या भला मैं निगाहों में उस का ही चेहरा बसा है उसी को ये दिल मानता अब ख़ुदा है ये दिल अब धड़कता ही उस के लिए है ये पागल तड़पता ही उस के लिए है कभी सोचता हूँ बहुत सोचता हूँ मैं कितना अभागा हूँ कह भी न पाया पनाहों में अपनी छिपा लो ना मुझ को मेरी बेख़ुदी से बचा लो ना मुझ को मुझे चैन पड़ता नहीं बिन तुम्हारे घड़ी भर गले से लगा लो ना मुझ को सुनो तुम सेे इक राज़ की बात कह दूँ ये चाहत बनी ही हमारे लिए थी मोहब्बत बनी ही हमारे लिए थी नहीं मैं ये हरगिज़ नहीं मान सकता कोई मुझ सेे ज़्यादा तुम्हें चाहता है ये वो सच है जिस का तुम्हें भी पता है मेरे जैसा कोई दिवाना नहीं है मगर तुम को दिल ही लगाना नहीं है कभी सोचता हूँ जो मेरी नहीं हो तो जिस की हो उस सेे चुरा लू मैं तुम को कभी सोचता हूँ कि ग़ज़लों में अपनी पिरो कर ज़रा गुनगुना लूँ मैं तुम को मगर जैसे क़िस्मत बदल सी गई है कि जैसे हर इक शख़्स ने बस हमें दूर करने की साज़िश रची है ग़लत हो रहा है अगर ये सही है कभी सोचता हूँ बहुत सोचता हूँ

Rohit tewatia 'Ishq'

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‘’निगाह’’ किस की ऐसी हया भरी निगाह देखोगी अक्स मेरा मिलेगा जिस जगह देखोगी जान मोहब्बत फ़िज़ूल नहीं बस थोड़ा सब्र करो नाग़वार गुज़रे इश्क़ की पनाह देखोगी किस की ऐसी हया भरी निगाह देखोगी पर मसअला कुछ इनकार का ज़रूर रहा होगा जिस सेे ख़ुद बे-ख़बर हूँ वो मेरा क़ुसूर रहा होगा फिर इल्ज़ाम सारे बेबुनियाद से आएँगे आगे मेरे ख़िलाफ़ ना एक मिलेगा जो गवाह देखोगी किस की ऐसी हया भरी निगाह देखोगी पर तेरा छोड़ के जाना मोहब्बत की तौहीन था मेरा क्या? मेरा दिल तो टूटने का शौक़ीन था अभी एक दुआ क़ुबूल होनी आम बात समझती हो फिर कोई मंदिर और सालो साल कोई दरग़ाह देखोगी किस की ऐसी हया भरी निगाह देखोगी

Rohit tewatia 'Ishq'

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“मेरा ये मन उदास है” किसी की याद आई है मेरा ये मन उदास है ख़लिश सी दिल पे छाई है मेरा ये मन उदास है ये ज़िंदगी की बात है ये इश्क़ ही की बात है कि भूल कर भी मैं जिसे कभी नहीं भुला सका कभी ख़ुशी से मैं जिसे गले नहीं लगा सका मैं उस सेे जितना दूर हूँ वो उतना मेरे पास है मेरा ये मन उदास है कोई जो जंग हो कभी किसी के संग हो कभी उसी को देखता हूँ मैं उसी को सोचता हूँ मैं ना हारने का ग़म है फिर ना जीतने की आस है मेरा ये मन उदास है

Rohit tewatia 'Ishq'

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