मुझे मालूम है जब पहली बार उसे छुऊँगा तो हाथ कापेंगे मेरे जिस्म में एक अजीब सा कम्पन्न महसूस होगा दिल की धड़कन थोड़ी बढ़ जाएगी कदम पीछे धकेलेंगे मुझ को साँसें तेज हो जायेंगी मग़र फिर भी मेरे सख़्त हाथ उस के नर्म गालों को छू कर ही दम लेंगे ऐसा मुझे यक़ीं है और कहीं उसे भी!!!
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"ख़ुदा नाराज़" कमाल है कमाल है मज़हब की बात पर क्यूँँ उठ रहे सवाल है बेहाल है बेहाल है सब मकड़ियों के जाल है दुनिया में रहना भी अब बहुत बड़ा जंजाल है बवाल है बवाल है गुज़र रही जो ज़िंदगी ये दिन है या कोई साल है मुझे आज की फ़िक्र तो है मुझे कल का भी ख़याल है नक़ाब है नक़ाब है हर चेहरे पर नक़ाब है जो शख़्स की ये ज़ात है वो साँप का भी बाप है जो दो-रुख़ा किरदार है ग़ज़ब है बे-मिसाल है दलाल है दलाल है सब सोच के दलाल है गुनाह भी उस का माफ़ है सब पैसे की ये चाल है क्या काल है क्या काल है ख़ुदा भी जो नाराज़ है 'इबादतों में मिल रहे जल्दबाज़ी के आ'माल है ख़ुद सोचना अब तो तू ज़रा मज़हब की बात पर क्यूँँ उठ रहे सवाल है कमाल है कमाल है
ZafarAli Memon
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"जन्मदिन मुबारक" दिन ये सोने से, रातें ये रंगीन मुबारक ऐ मेरी साँसों की रवानी तुझ को तेरा जन्मदिन मुबारक भवरें मुस्काएँ, फूलों की डाली-डाली हँसें जब तू मुस्काए, तेरे होंठों की लाली हँसें मेरा कत़्ल करे, तेरे नैन कजरारे काले मजरूह हुए ना जाने कितने मतवाले तुझ को ये बहारें शौकीन मुबारक ऐ मेरी तसव्वुर की रानी तुझ को तेरा जन्मदिन मुबारक
Vikas Sangam
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"जज़्बात" जो ये आँखों से बह रहा है कितने हम लाचार है तुम समझो तो इंतिज़ार है वरना कोई इंतिज़ार नहीं तुम्हारी याद में ऐसे डूबा जैसे कोई बीमार है तुम समझो तो बे-क़रार है वरना कोई बे-क़रार नहीं जो मेरी धड़कन चल रही है इन में बस तुम्हारा नाम है तुम समझो तो ये पुकार है वरना कोई पुकार नहीं इन हाथो से तुम्हारी ज़ुल्फ़ें सँवारनी हैं हर शाम तुम्हारे साथ गुज़ारनी है तुम समझो तो ये दुलार है वरना कोई दुलार नहीं तुम्हारे बस दिल में जगह नहीं तुम्हारी रूह से रिश्ता चाहिए तुम समझो तो ये आर-पार है वरना कुछ आर-पार नहीं तुम्हें मिल तो जाएगा मुझ सेे अच्छा सामने तुम्हारे तो क़तार है तुम्हें पता है ना तुम्हारी चाहत का बस एक हक़दार है बाकी कोई हक़दार नहीं तुम्हारी बाँहों में ही सुकून मिलेगा मुझे सच कहूँ तो दरकार है तुम समझो तो ये बहार है वरना कहीं बहार नहीं तुम्हारी गोद में आराम चाहिए तुम्हारी आवाज़ में बस अपना नाम चाहिए तुम समझो तो ये क़रार है वरना कोई क़रार नहीं तुम हो जो मेरे जीवन का तुम नहीं तो सब बेज़ार है तुम समझो तो ये आधार है वरना कोई आधार नहीं काश तुम भी हम सेे इक़रार करते चाहत की बरसात मूसला-धार करते मैं तुम सेे बेहद करता और तुम बेहद की भी हद पार करते तुम समझो तो इन सब के आसार हैं वरना कोई आसार नहीं अगर तुम कोशिश करते तो पता चलता की तुम हो तो घर-बार है तुम से ही मेरा संसार है वरना कोई संसार नहीं बिन तेरे ज़िन्दगी तो रहेगी काट लेंगे तुम्हारे बिना तुम समझो तो जीने का विचार है वरना कोई विचार नहीं ये दुनिया भले कुछ भी बोले तुम मेरी नहीं तो क्या मैं तुम्हारा तो हूँ ना यही मेरा इज़हार है अगर तुम समझो तो ये प्यार है वरना कोई प्यार नहीं
Divya 'Kumar Sahab'
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रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई डरता हूँ कहीं ख़ुश्क न हो जाए समुंदर राख अपनी कभी आप बहाता नहीं कोई इक बार तो ख़ुद मौत भी घबरा गई होगी यूँ मौत को सीने से लगाता नहीं कोई माना कि उजालों ने तुम्हें दाग़ दिए थे बे-रात ढले शमा' बुझाता नहीं कोई साक़ी से गिला था तुम्हें मय-ख़ाने से शिकवा अब ज़हरस भी प्यास बुझाता नहीं कोई हर सुब्ह हिला देता था ज़ंजीर ज़माना क्यूँ आज दिवाने को जगाता नहीं कोई अर्थी तो उठा लेते हैं सब अश्क बहा के नाज़-ए-दिल-ए-बेताब उठाता नहीं कोई
Kaifi Azmi
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वे डरते हैं किस चीज़ से डरते हैं वे तमाम धन-दौलत गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद ? वे डरते हैं कि एक दिन निहत्थे और ग़रीब लोग उन सेे डरना बंद कर देंगे
Gorakh Pandey
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तुझ में बीते दिन तुझ में बीतीं रातें मेरा ये जीवन तेरी सौगातें सुब्ह की धूप रात की चाँदनी जीवन की डोर तुझी से बाँधनी तुझ सेे शुरू ज़िन्दगी तुझ पे खतम जब तू है साथ फिर ना कोई ग़म ये चार पल का फसाना आना और जाना तुम सेे दिल लगाना रूठना और मनाना चाहतों की कहानी सुन ले मेरी ज़ुबानी तोड़ना फिर जोड़ना मुझ सेे मुँह ना मोड़ना
Kumar Rishi
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चल स्टेशन घूमने चलते हैं कोई नहीं देखेगा हमें वहाँ हम किसी के क्या लगते हैं करेंगे अपनी मनमानी कभी इस प्लेटफार्म पर तो कभी उस प्लेटफार्म पर बैठेंगे पिएँगे गरम चाय गरम समोसे खाएंगे देखेंगे आती जाती ट्रेनों को चढ़ते उतरते मुसाफ़िरों को सुनेंगे कुली की आवाज़ों को देखेंगे ट्रैक पर घूमते आवारा कुत्तों को सुनेंगे रेलगाड़ी की सूचनाओं को पढ़ेंगे लोगों के चेहरे उन की भावनाओं को दृश्य बड़े ही रोचक होते हैं स्टेशन के ज़िन्दगी के हर हाल को दर्शाते हैं जगह-जगह से यात्री यहाँ आते हैं हम भी तो यात्री ही हैं इस दुनिया में बस इस की ट्रेन कभी लेट नहीं होती एक दम समय पर है आती रेलवे जैसी उदघोषणा नहीं करती मग़र काश करती तो कुछ ज़रूरी काम निपटा जाते जो हमारे जाने के बा'द छूट जाते हैं चल स्टेशन घूमने चलते हैं कोई नहीं देखेगा हमें वहाँ हम किसी के क्या लगते हैं
Kumar Rishi
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तुम्हीं दिल तुम्हीं धड़कन तुम्हीं साँस हो तुम्हीं तड़पन तुम्हीं से दिन तुम्हीं से रात तुम्हीं मेरी दुनिया तुम्हीं मेरी काइनात तुम्हीं ज़मीं तुम्हीं आसमाँ तुम्हीं मेरा पूरा जहाँ तुम्हीं मंज़िल तुम्हीं रास्ता दुनिया से नहीं कोई वास्ता खो कर ख़ुद को पा लिया है तुझे चाहूँ हर जनम में रब से तुझे
Kumar Rishi
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ऐ दिल रूक जा थम जा ठहर जा सब्र कर धीरज धर मंज़िल अभी दूर है रास्तों का मज़ा ले यूँँ न ख़ुद को सज़ा दे बस चला चल रूक मत पीछे मत देख जो छूट गया सो छूट गया जो रूठ गया सो रूठ गया बीती बातें भुलाता चल ऐ दिल बस चला चल तेरा वास्ता तेरी मंज़िल से है तेरा ख़ुदा तेरे अंदर है कर उस पर भरोसा बस चला चल बस चला चल
Kumar Rishi
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मैं ने इंसानों के बीच कुत्ते को दुम हिलाते देखा है मैं ने इंसानों के बीच इंसान को भी दुम हिलाते देखा है मैं ने इंसानों के बीच कुत्ते को झूठन खाते देखा है मैं ने इंसानों के बीच इंसान को भी झूठन खाते देखा है मैं ने महँगी गाड़ियों में, आलीशान बंगलों में कुत्ते को रहते हुए देखा है मैं ने गंदे नालों फुटपाथों पे इंसान को रगड़ते देखा है इसी जन्म में मैं ने कुत्ते को इंसान और इंसान को कुत्ता बनते देखा है
Kumar Rishi
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