nazmKuch Alfaaz

"मुश्किल' मुझ में एक सवाल था जो ता-उम्र मुझे मुश्किल में रखा क्यूँ?, वो शख़्स हमारा न हो सका उम्र भर जिसे हम ने दिल में रखा ता-उम्र इसी सवाल ने, हाँ मुझे मुश्किल में रखा उस के दिल में कोई राज था जो राज उस ने दिल में रखा बात ही बात में क्या बात आज हो गई? जो उस ने दिल की बात भरी महफ़िल में रखा ता-उम्र इसी सवाल ने, हाँ मुझे मुश्किल में रखा ढूँढो उसे कि हाँ गया लम्हा मेरा कहाँ गया जिसे चुरा के ज़माने से हम ने राह-ए-मंज़िल में रखा ता-उम्र इसी सवाल ने, हाँ मुझे मुश्किल में रखा

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तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से

Zubair Ali Tabish

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तुम्हारा फ़ोन आया है अजब सी ऊब शामिल हो गई है रोज़ जीने में पलों को दिन में, दिन को काट कर जीना महीने में महज़ मायूसियाँ जगती हैं अब कैसी भी आहट पर हज़ारों उलझनों के घोंसले लटके हैं चौखट पर अचानक सब की सब ये चुप्पियाँ इक साथ पिघली हैं उम्मीदें सब सिमट कर हाथ बन जाने को मचली हैं मेरे कमरे के सन्नाटे ने अँगड़ाई सी तोड़ी है मेरी ख़ामोशियों ने एक नग़्मा गुनगुनाया है तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है सती का चैतरा दिख जाए जैसे रूप-बाड़ी में कि जैसे छठ के मौक़े' पर जगह मिल जाए गाड़ी में मेरी आवाज़ से जागे तुम्हारे बाम-ओ-दर जैसे ये नामुमकिन सी हसरत है, ख़याली है, मगर जैसे बड़ी नाकामियों के बा'द हिम्मत की लहर जैसे बड़ी बेचैनियों के बा'द राहत का पहर जैसे बड़ी गुमनामियों के बा'द शोहरत की मेहर जैसे सुब्ह और शाम को साधे हुए इक दोपहर जैसे बड़े उनवान को बाँधे हुए छोटी बहर जैसे नई दुल्हन के शरमाते हुए शाम-ओ-सहर जैसे हथेली पर रची मेहँदी अचानक मुस्कुराई है मेरी आँखों में आँसू का सितारा जगमगाया है तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है

Kumar Vishwas

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"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है

Ali Zaryoun

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मुझ को इतने से काम पे रख लो जब भी सीने में झूलता लॉकेट उल्टा हो जाए तो मैं हाथों से सीधा करता रहूँ उस को जब भी आवेज़ा उलझे बालों में मुस्कुरा के बस इतना-सा कह दो 'आह, चुभता है ये, अलग कर दो।' जब ग़रारे में पाँव फँस जाए या दुपट्टा किसी किवाड़ से अटके इक नज़र देख लो तो काफ़ी है 'प्लीज़' कह दो तो अच्छा है लेकिन मुस्कुराने की शर्त पक्की है मुस्कुराहट मुआवज़ा है मेरा मुझ को इतने से काम पे रख लो

Gulzar

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मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

Sahir Ludhianvi

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"फुटपाथ" चल सकता नहीं जिस्म, मचलता है जज़्बात बीते दिन यहीं बीते रात, है घर मेरा ये फुटपाथ सुख की घटा नहीं छाती, हँसी के बादल नहीं आते बाबा, देखो ना मेरे हिस्से में ख़ुशी के पल नहीं आते अब हर पल इन आँखों से होती ग़मों की बरसात बीते दिन यहीं बीते रात, है घर मेरा ये फुटपाथ

Vikas Sangam

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"चुप्पियाँ" तेरी ख़ामोशियाँ तड़पाती हैं मुझे ये उदासियाँ सताती हैं मुझे ग़म-ए-दिल का सहारा नहीं है अब तेरा चुप रहना गवारा नहीं है जब तक तुझे मैं सुन सकता हूँ तेरे अल्फ़ाज़ मैं चुन सकता हूँ अब सीने से लगा ले मुझे ये चुप्पियाँ मार न डाले मुझे ये तन्हाइयाँ खलती हैं दिल में बेचैनियाँ पलती हैं कुछ बोल

Vikas Sangam

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"अभी जाओ" अभी जाओ की तन्हाई से रुख़्सत हो जाऊँ तो आना दिल रोए, मैं मुस्कुराऊँ तो आना अभी कुछ कहने, सुनने की इच्छा नहीं हाँ, कुछ कह पाऊँ कुछ सुन पाऊँ तो आना अभी जाओ जाओ इस क़दर कि तुम्हें रोकना चाहूँ तो न रोक पाऊँ जाओ इस क़दर कि तुम्हें मुस्कुराता देख मैं भी मुस्कुराऊँ जाओ अभी जाओ अभी जाओ के दर्दों को सीने से लगाना है मुझे अभी जाओ की ख़ुद को कहीं छुपाना है मुझे अभी ग़म है कहीं सीने में जगा हुआ ग़मों से नाता तोड़ लूँ तो आना अपनी आँखें निचोड़ लूँ तो आना अभी जाओ

Vikas Sangam

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"मेरे साथिया" कैसे मैं जीऊँ तेरे बिन, मेरे साथिया कैसे मैं जीऊँ तेरे बिन ना रातें बीते ना ही दिन, मेरे साथिया कैसे मैं जीऊँ तेरे बिन, मेरे साथिया कैसे मैं जीऊँ तेरे बिन तुझी से थे ग़म तुुझी से थी ख़ुशी मेरी तूँ ही नहीं तो तबाह है ज़िन्दगी मेरी तूँ चाहत, तूँ हसरत, है तू ही मोहब्बत बिन तेरे जानम बर्बाद आशिक़ी मेरी हर ख़ुशी गई मुझ सेे छीन, मेरे साथिया कैसे मैं जीऊँ तेरे बिन, मेरे साथिया कैसे मैं जीऊँ तेरे बिन

Vikas Sangam

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"भूला न देना" सुनो, बदलते वक़्त के साथ तुम बदल तो नहीं जाओगी तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगी वो अपनी मुलाक़ातें, वो देर तक फोन पर बातें साथ हँसना, साथ रोना, रूठना, मनाना तुम भूल तो नहीं जाओगी पता है! हम एक-दूसरे के कभी नहीं हो सकते लेकिन ये तो बा'द की बात है नहम एक-दूसरे के हो चुके हैं, है न? पता है, जो आज है कल नहीं होगा एक दिन ये साथ छुट जाएँगे उम्मीदों के धागे टूट जाएँगे तन कहीं और मन कहीं होगा यादों के सिवा कुछ नहीं होगा पता है, जो आज है कल नहीं होगा अक़्श आँखों से मिटा न सकूँगा चाह कर भी तुम्हें भूला न सकूँगा कैसे यक़ीं दिलाऊँ तुम्हें तुम मुझे बहुत याद आओगी सुनो, तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगी

Vikas Sangam

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