nazmKuch Alfaaz

“सभी से क़ीमती है वो” कहो उस सेे उसी को बस उसी को प्यार करता हूँ अभी भी बस उसी को गीत में गुलज़ार करता हूँ मुझे कुछ भी सिवा उस के यहाँ दिखता नहीं है अब उसे यूँँ छोड़ना प्यारे सरल इतना नहीं है अब मुहब्ब़त कर रहा हूँ तो निभा के भी दिखाऊँगा उसे मैं चाहता हूँ यार पाके भी दिखाऊँगा उसे ही याद करता हूँ मिरी हालत यही है अब उसे मैं भूल जाऊँ यार ये मुमकिन नहीं है अब कि उस की चाह में बर्बाद होना ठीक जानू मैं मिलेगा चैन तब मुझ को उसे अपना बना लूँ मैं जो ख़ुशियों से भरे थे यार वो दिन रात देखे हैं हज़ारों ख़्वाब बस मैं ने उसी के साथ देखे हैं हमारी आशिक़ी है वो हमारी ज़ि़ंदगी है वो मुझे वो चाहिए है बस सभी से क़ीमती है वो

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मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

Sahir Ludhianvi

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"महबूबा के नाम" तू अपनी चिट्ठियों में मीर के अश'आर लिखती है मोहब्बत के बिना है ज़िंदगी बेकार लिखती है तेरे ख़त तो इबारत हैं वफ़ादारी की क़समों से जिन्हें मैं पढ़ते डरता हूँ वही हर बार लिखती है तू पैरोकार लैला की है शीरीं की पुजारन है मगर तू जिस पे बैठी है वो सोने का सिंहासन है तेरी पलकों के मस्कारे तेरे होंठों की ये लाली ये तेरे रेशमी कपड़े ये तेरे कान की बाली गले का ये चमकता हार हाथों के तेरे कंगन ये सब के सब है मेरे दिल मेरे एहसास के दुश्मन कि इन के सामने कुछ भी नहीं है प्यार की क़ीमत वफ़ा का मोल क्या क्या है ऐतिबार की क़ीमत शिकस्ता कश्तियों टूटी हुई पतवार की क़ीमत है मेरी जीत से बढ़कर तो तेरी हार की क़ीमत हक़ीक़त ख़ून के आँसू तुझे रुलवाएगी जानाँ तू अपने फ़ैसले पर बा'द में पछताएगी जानाँ मेरे काँधे पे छोटे भाइयों की ज़िम्मेदारी है मेरे माँ बाप बूढ़े है बहन भी तो कुँवारी है बरहना मौसमों के वार को तू सह न पाएगी हवेली छोड़ कर तू झोपड़ी में रह न पाएगी अमीरी तेरी मेरी मुफ़्लिसी को छल नहीं सकती तू नंगे पाँव तो कालीन पर चल नहीं सकती

Abrar Kashif

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पानी कौन पकड़ सकता है जब वो इस दुनिया के शोर और ख़मोशी से क़त'अ-तअल्लुक़ होकर इंग्लिश में ग़ुस्सा करती है, मैं तो डर जाता हूँ लेकिन कमरे की दीवारें हँसने लगती हैं वो इक ऐसी आग है जिसे सिर्फ़ दहकने से मतलब है, वो इक ऐसा फूल है जिस पर अपनी ख़ुशबू बोझ बनी है, वो इक ऐसा ख़्वाब है जिस को देखने वाला ख़ुद मुश्किल में पड़ सकता है, उस को छूने की ख़्वाइश तो ठीक है लेकिन पानी कौन पकड़ सकता है वो रंगों से वाकिफ़ है बल्कि हर इक रंग के शजरे तक से वाकिफ़ है, उस को इल्म है किन ख़्वाबों से आँखें नीली पढ़ सकती हैं, हम ने जिन को नफ़रत से मंसूब किया वो उन पीले फूलों की इज़्ज़त करती है कभी-कभी वो अपने हाथ में पेंसिल ले कर ऐसी सतरें खींचती है सब कुछ सीधा हो जाता है वो चाहे तो हर इक चीज़ को उस के अस्ल में ला सकती है, सिर्फ़ उसी के हाथों से सारी दुनिया तरतीब में आ सकती है, हर पत्थर उस पाँव से टकराने की ख़्वाइश में ज़िंदा है लेकिन ये तो इसी अधूरेपन का जहाँ है, हर पिंजरे में ऐसे क़ैदी कब होते हैं हर कपड़े की किस्मत में वो जिस्म कहाँ है मेरी बे-मक़सद बातों से तंग भी आ जाती है तो महसूस नहीं होने देती लेकिन अपने होने से उकता जाती है, उस को वक़्त की पाबंदी से क्या मतलब है वो तो बंद घड़ी भी हाथ में बाँध के कॉलेज आ जाती है

Tehzeeb Hafi

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जब छुआ साथ तुलसी चौरा आँखों में साँसों को खींचे तुम सेे जो वा'दा किया कभी पड़िया जी के पीपल नीचे तुम ने चाहा था ख़ुश रहना ख़ुद ख़ुशी सदा मुझ से सीखे दुनिया भर के संकल्प सतत पूरे होते मुझ में दीखे ख़ुद से अनुबंध किया है अब मन को निर्बंध किया है अब गत-विगत मुक्त हो सकने का सम्पूर्ण प्रबन्ध किया है अब इस नए साल के पहले दिन तुम से बाहर सोचा तो है मन-प्राण सुमरनी छोड़ेंगे सुनते तो हैं होता तो है काफ़ी है।

Kumar Vishwas

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जब वो इस दुनिया के शोर और ख़ामोशी से कता तअल्लुक़ होकर इंग्लिश में ग़ुस्सा करती है, मैं तो डर जाता हूँ लेकिन कमरें की दीवारें हँसने लगती हैं वो इक ऐसी आग है जिस को सिर्फ़ दहकने से मतलब है वो एक ऐसा ख़्वाब है जिस को देखने वाला ख़ुद मुश्किल में पड़ सकता है उस को छूने की ख़्वाहिश तो ठीक है लेकिन पानी कौन पकड़ सकता है वो रंगों से वाक़िफ है बल्कि हर एक रंग के शजरे तक से वाक़िफ है हम ने जिन फूलों को नफ़रत से मंसूब किया वो उन पीले फूलों की इज़्ज़त करती है कभी कभी वो अपने हाथ में पेंसिल ले कर ऐसी सतरें खेंचती है, सब कुछ सीधा हो जाता है वो चाहे तो हर इक चीज़ को उस के अस्ल में ला सकती है सिर्फ़ उसी के हाथों से दुनिया तरतीब में आ सकती है हर पत्थर उस पाँव से टकराने की ख़्वाहिश में ज़िंदा लेकिन ये तो इसी अधूरेपन का जहाँ हैं हर पिंजरे में ऐसे क़ैदी कब होते हैं हर कपड़े की क़िस्मत में वो जिस्म कहाँ हैं मेरी बे-मक़सद बातों से तंग भी आ जाती है तो महसूस नहीं होने देती लेकिन अपने होने से उकता जाती है उस को वक़्त की पाबंदी से क्या मतलब है वो तो बंद घड़ी भी हाथ में बाँध के कालेज आ जाती है

Tehzeeb Hafi

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"सच्चा प्रेम" हम तो उस मोहन के कायल जिस पर सब गोपी मरती थीं जिस को वो अपना कहती थीं जिस को बाँहो में भरती थीं लेकिन उस मोहन को देखो उस मोहन के मन को देखो बस इक की चाहत करता था या'नी राधे पे मरता था या'नी राधे पे मरता था

Kaviraj " Madhukar"

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"सच में तुम बेहद अच्छी हो" सब सेे प्यारी तुम लगती हो बस मुझ में ही गुम लगती हो वैसे ये दुनिया जँचती है पर दुनियाँ में तुम जँचती हो सच में तुम बेहद अच्छी हो इतनी अच्छी पूछो ही मत जैसे कोई चाँद सितारा जैसे माँ का बच्चा प्यारा जैसे रौशन रस्ता लगता वैसा रौशन तेरा दिल है शायद मेरी तू मंज़िल है तुझ को खोजा हर पल मैं ने हर इक घर में, हर दरवाज़े लेकिन तुम मेरे दिल में हो मेरी आँखों में रहती हो पर मैं ठहरा पागल लड़का सच को तो मैं अब हूँ समझा और कहीं तू होती कैसे मेरे ही दिल में बसती हो सच में तुम बेहद अच्छी हो

Kaviraj " Madhukar"

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" करेंगे बस तुम्हें ही प्यार हम तो " तुम्हीं पे जान हम मरते रहेगें तुम्हीं से बात बस करते रहेगें रखेगें हम तुम्हें अपना बना कर हक़ीक़त याकि फिर सपना बना कर कभी भी हम न होंगे दूर तुम सेे करेंगे प्यार भी भरपूर तुम सेे तुम्हारा नाम ही ये दिल पुकारे कि रहना साथ तुम हर पल हमारे हमारी आशिक़ी तुम बन चुकी हो हमारी बन्दगी तुम बन चुकी हो तुम्हीं में हर ख़ुशी अब दिख रही है तुम्हीं में ज़िन्दगी अब दिख रही है तुम्हीं पे मर मिटे हैं यार हम तो करेंगे बस तुम्हें ही प्यार हम तो

Kaviraj " Madhukar"

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"महबूब से गुहार" भरोसा मैं तिरा करता रहूँ तुझे ही बस यहाँ अपना कहूँ कि आओ भी मिरे अब पास तुम बनाओ भी मुझे अब ख़ास तुम मुझे जीना तिरे ही साथ है तुझी से तो मिरे दिन रात है मुझे तेरा सहारा चाहिए कि कश्ती को किनारा चाहिए सुनो भी बात को मेरी सनम तुझे ही चाहता अपनी क़सम यहाँ कोई मुझे भाता नहीं तिरे बिन अब रहा जाता नहीं

Kaviraj " Madhukar"

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"तुम सेे प्यार हम को हो चुका है" हमारा दिल तुम्हीं में खो चुका है कि तुम सेे प्यार हम को हो चुका है न है मालूम दिल को क्या हुआ है तुम्हारी सोच में डूबा हुआ है तुम्हें ही याद करता जा रहा है तुम्हें ही ख़्वाब में भी पा रहा है जहाँ देखूँ तुम्हें तुम तो वही हो तुम्हीं तुम बस मुझे अब दिख रही हो तुम्हारे इश्क़ में जबसे पडा़ हूँ नहीं मालूम क्या से क्या हुआ हूँ तुम्हीं मंजिल तुम्हीं हो रास्ता अब तुम्हीं से हो गया है वास्ता अब तुम्हारे बिन नहीं कुछ भी यहाँ मैं तुम्हारे साथ हूँ सारा जहाँ मैं तुम्हें अपना ख़ुदा भी मानता हूँ तुम्हें अपना पता भी मानता हूँ हमारा दिल ख़ुशी से खिल गया है कि जबसे तुम मिले सब मिल गया है

Kaviraj " Madhukar"

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