" करेंगे बस तुम्हें ही प्यार हम तो " तुम्हीं पे जान हम मरते रहेगें तुम्हीं से बात बस करते रहेगें रखेगें हम तुम्हें अपना बना कर हक़ीक़त याकि फिर सपना बना कर कभी भी हम न होंगे दूर तुम सेे करेंगे प्यार भी भरपूर तुम सेे तुम्हारा नाम ही ये दिल पुकारे कि रहना साथ तुम हर पल हमारे हमारी आशिक़ी तुम बन चुकी हो हमारी बन्दगी तुम बन चुकी हो तुम्हीं में हर ख़ुशी अब दिख रही है तुम्हीं में ज़िन्दगी अब दिख रही है तुम्हीं पे मर मिटे हैं यार हम तो करेंगे बस तुम्हें ही प्यार हम तो
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"अंजाम" हैं लबरेज़ आहों से ठंडी हवाएँ उदासी में डूबी हुई हैं घटाएँ मोहब्बत की दुनिया पे शाम आ चुकी है सियह-पोश हैं ज़िंदगी की फ़ज़ाएँ मचलती हैं सीने में लाख आरज़ुएँ तड़पती हैं आँखों में लाख इल्तिजाएँ तग़ाफ़ुल की आग़ोश में सो रहे हैं तुम्हारे सितम और मेरी वफ़ाएँ मगर फिर भी ऐ मेरे मासूम क़ातिल तुम्हें प्यार करती हैं मेरी दुआएँ
Faiz Ahmad Faiz
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'उदासी' इबारत जो उदासी ने लिखी है बदन उस का ग़ज़ल सा रेशमी है किसी की पास आती आहटों से उदासी और गहरी हो चली है उछल पड़ती हैं लहरें चाँद तक जब समुंदर की उदासी टूटती है उदासी के परिंदों तुम कहाँ हो मिरी तन्हाई तुम को ढूँढती है मिरे घर की घनी तारीकियों में उदासी बल्ब सी जलती रही है उदासी ओढ़े वो बूढ़ी हवेली न जाने किस का रस्ता देखती है उदासी सुब्ह का मासूम झरना उदासी शाम की बहती नदी है
Sandeep Thakur
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मैं सपनों में ऑक्सीजन प्लांट इंस्टॉल कर रहा हूँ और हर मरने वाले के साथ मर रहा हूँ मैं अपने लफ़्ज़ों के जरिए तुम्हें साँसों के सिलेंडर भेजूँगा जो तुम्हें इस जंग में हारने नहीं देंगे और तुम्हारी देखभाल करने वालों के हाथों को काँपने नहीं देंगे ऑक्सीजन स्टॉक ख़त्म होने की ख़बरें गर्दिश भी करें तो क्या मैं तुम्हारे लिए अपनी नज़्मों से वेंटीलेटर बनाऊँगा अस्पतालों के बिस्तर भर भी जाएँ कुछ लोग तुम सेे बिछड़ भी जाएँ तो हौसला मत हारना क्यूँँकि रात चाहे जितनी मर्ज़ी काली हो गुज़र जाने के लिए होती है रंग उतर जाने के लिए होते हैं और ज़ख़्म भर जाने के होते हैं
Tehzeeb Hafi
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तुम हमारे लिए तुम हमारे लिए अर्चना बन गई हम तुम्हारे लिए एक दर्पण प्रिये तुम मिलो तो सही हाल पूछो मेरा हम न रो दें तो कह देना पत्थर प्रिये प्यार मिलना नहीं था अगर भाग्य में देवताओं ने हम सेे ये छल क्यूँ किया मेरे दिल में भरी रेत ही रेत थी दे के अमृत ये हम को विकल क्यूँ किया अप्सरा हो तो हो पर हमारे लिए तुम ही सुंदर सुकोमल सुघर हो प्रिये देवताओं के गणितीय संसार में ऐसा भी है नहीं कोई अच्छा न था हम अगर इस जनम भी नहीं मिल सके सब कहेंगे यही प्यार सच्चा न था कायरों को कभी प्यार मिलता नहीं फ़ैसला कोई ले लो कि डटकर प्रिये मम्मी कहती थीं चंदा बहुत दूर है चाँद से आगे हम को सितारा लगा यूँँ तो चेहरे ही चेहरे थे दुनिया में पर एक तेरा ही चेहरा पियारा लगा पलकों पे मेरी रख कर क़दम तुम चलो पॉंव में चुभ न जाए कि कंकड़ प्रिये
Rakesh Mahadiuree
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"क्यूँ है" तुम नहीं हो यहाँ पर फिर भी तुम्हारे होने का एहसास क्यूँ है कुछ है नहीं मेरे हाथ में फिर भी कुछ होने की ये आस क्यूँ है बड़ी हैरानी है मुझे की वो दूर होकर भी इतना पास क्यूँ है सबने कहा कि वो तो पराया है वो पराया होकर भी इतना ख़ास क्यूँ है जितना वो दूर है मुझ सेे वो उतना ही मुझ को रास क्यूँ है बैठा हूँ बिल्कुल एकांत में मैं फिर भी कानों में उस की आवाज़ क्यूँ है खुल के नहीं कहती वो कुछ भी उस की आँखों में इतने राज़ क्यूँ हैं बसी है दिल में वो मेरे ये मेरा दिल उस का आवास क्यूँ है उस को नहीं भुला सकता मैं ये उस के नाम की हर श्वास क्यूँ है पूरी काइनात उस की याद दिलाती है ये तन-मन में उस का वास क्यूँ है वो मेरी हुई नहीं है अभी उस को खोने के डर से मन इतना बदहवा से क्यूँ है दूरियाँ लिखी हैं जैसे दरमियान मेरा नसीब मुझ सेे इतना नाराज़ क्यूँ है ऐसे शब्द कहाँ से लाऊँ की वो समझे जो गर ना समझा पाए तो फिर ऐसे अल्फ़ाज़ क्यूँ हैं रह तो रहा हूँ अपने निवास में उस के बिन लगता ये वनवास क्यूँ है गर मिल भी जाए संपत्ति सारी दुनिया की मगर वो साथ नहीं तो फिर ये भोगविलास क्यूँ है सोते ही उस के ख़्वाबों में और जागते ही उस के ख़यालों में कैसे भी उस का हो जाने की इतनी प्यास क्यूँ है जलती हैं ये नज़रें अब मेरी इन नैनों को हर वक़्त तेरी तलाश क्यूँ है हालात कह रहे हैं कि ये मुमकिन नहीं फिर भी तुम पुकारोगी एक दिन मुझे इतना विश्वास क्यूँ है अब भी नहीं समझी क्यूँ है तुम्हारी बहुत याद आती है तुम बिन रहा नहीं जाता बस बात कुछ यों है तुम सेे बेपनाह मोहब्बत थी है और रहेगी ये सत्य ज्यूँ का त्यों है क्यूँ है
Divya 'Kumar Sahab'
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“सभी से क़ीमती है वो” कहो उस सेे उसी को बस उसी को प्यार करता हूँ अभी भी बस उसी को गीत में गुलज़ार करता हूँ मुझे कुछ भी सिवा उस के यहाँ दिखता नहीं है अब उसे यूँँ छोड़ना प्यारे सरल इतना नहीं है अब मुहब्ब़त कर रहा हूँ तो निभा के भी दिखाऊँगा उसे मैं चाहता हूँ यार पाके भी दिखाऊँगा उसे ही याद करता हूँ मिरी हालत यही है अब उसे मैं भूल जाऊँ यार ये मुमकिन नहीं है अब कि उस की चाह में बर्बाद होना ठीक जानू मैं मिलेगा चैन तब मुझ को उसे अपना बना लूँ मैं जो ख़ुशियों से भरे थे यार वो दिन रात देखे हैं हज़ारों ख़्वाब बस मैं ने उसी के साथ देखे हैं हमारी आशिक़ी है वो हमारी ज़ि़ंदगी है वो मुझे वो चाहिए है बस सभी से क़ीमती है वो
Kaviraj " Madhukar"
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"सच्चा प्रेम" हम तो उस मोहन के कायल जिस पर सब गोपी मरती थीं जिस को वो अपना कहती थीं जिस को बाँहो में भरती थीं लेकिन उस मोहन को देखो उस मोहन के मन को देखो बस इक की चाहत करता था या'नी राधे पे मरता था या'नी राधे पे मरता था
Kaviraj " Madhukar"
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"महबूब से गुहार" भरोसा मैं तिरा करता रहूँ तुझे ही बस यहाँ अपना कहूँ कि आओ भी मिरे अब पास तुम बनाओ भी मुझे अब ख़ास तुम मुझे जीना तिरे ही साथ है तुझी से तो मिरे दिन रात है मुझे तेरा सहारा चाहिए कि कश्ती को किनारा चाहिए सुनो भी बात को मेरी सनम तुझे ही चाहता अपनी क़सम यहाँ कोई मुझे भाता नहीं तिरे बिन अब रहा जाता नहीं
Kaviraj " Madhukar"
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"सच में तुम बेहद अच्छी हो" सब सेे प्यारी तुम लगती हो बस मुझ में ही गुम लगती हो वैसे ये दुनिया जँचती है पर दुनियाँ में तुम जँचती हो सच में तुम बेहद अच्छी हो इतनी अच्छी पूछो ही मत जैसे कोई चाँद सितारा जैसे माँ का बच्चा प्यारा जैसे रौशन रस्ता लगता वैसा रौशन तेरा दिल है शायद मेरी तू मंज़िल है तुझ को खोजा हर पल मैं ने हर इक घर में, हर दरवाज़े लेकिन तुम मेरे दिल में हो मेरी आँखों में रहती हो पर मैं ठहरा पागल लड़का सच को तो मैं अब हूँ समझा और कहीं तू होती कैसे मेरे ही दिल में बसती हो सच में तुम बेहद अच्छी हो
Kaviraj " Madhukar"
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"तुम सेे प्यार हम को हो चुका है" हमारा दिल तुम्हीं में खो चुका है कि तुम सेे प्यार हम को हो चुका है न है मालूम दिल को क्या हुआ है तुम्हारी सोच में डूबा हुआ है तुम्हें ही याद करता जा रहा है तुम्हें ही ख़्वाब में भी पा रहा है जहाँ देखूँ तुम्हें तुम तो वही हो तुम्हीं तुम बस मुझे अब दिख रही हो तुम्हारे इश्क़ में जबसे पडा़ हूँ नहीं मालूम क्या से क्या हुआ हूँ तुम्हीं मंजिल तुम्हीं हो रास्ता अब तुम्हीं से हो गया है वास्ता अब तुम्हारे बिन नहीं कुछ भी यहाँ मैं तुम्हारे साथ हूँ सारा जहाँ मैं तुम्हें अपना ख़ुदा भी मानता हूँ तुम्हें अपना पता भी मानता हूँ हमारा दिल ख़ुशी से खिल गया है कि जबसे तुम मिले सब मिल गया है
Kaviraj " Madhukar"
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