"तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है" ज़िंदा हूँ पर जान नहीं है तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है लम्हा लम्हा तन्हाई है बे-ताबी है रुसवाई है और जो ग़म की ये खाई है तेरी मोहब्बत में पाई है साँसों का एहसान नहीं है तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है हँसती है कब याद तुम्हारी डसती है अब याद तुम्हारी जलती है सब याद तुम्हारी मुझ में हर शब याद तुम्हारी मुश्किल है आसान नहीं है तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है बरखा सावन हार गई मैं जो था पावन हार गई मैं सब तन मन धन हार गई मैं या'नी जीवन हार गई मैं चैन का भी उनवान नहीं है तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है जाम में जब हम भर जाएँगे नाम तेरे वो कर जाएँगे थक के फिर हम घर जाएँगे इश्क़ में इक दिन मर जाएँगे तेरे सिवा ईमान नहीं है तुझ बिन कुछ अरमान नहीं है
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वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे जो इश्क़ को काम समझते थे या काम से आशिक़ी करते थे हम जीते-जी मसरूफ़ रहे कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया काम इश्क़ के आड़े आता रहा और इश्क़ से काम उलझता रहा फिर आख़िर तंग आ कर हम ने दोनों को अधूरा छोड़ दिया
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से
Zubair Ali Tabish
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मैं सिगरेट तो नहीं पीता मगर हर आने वाले से पूछ लेता हूँ कि "माचिस है?" बहुत कुछ है जिसे मैं फूँक देना चाहता हूँ.
Gulzar
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"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है
Ali Zaryoun
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"महबूबा के नाम" तू अपनी चिट्ठियों में मीर के अश'आर लिखती है मोहब्बत के बिना है ज़िंदगी बेकार लिखती है तेरे ख़त तो इबारत हैं वफ़ादारी की क़समों से जिन्हें मैं पढ़ते डरता हूँ वही हर बार लिखती है तू पैरोकार लैला की है शीरीं की पुजारन है मगर तू जिस पे बैठी है वो सोने का सिंहासन है तेरी पलकों के मस्कारे तेरे होंठों की ये लाली ये तेरे रेशमी कपड़े ये तेरे कान की बाली गले का ये चमकता हार हाथों के तेरे कंगन ये सब के सब है मेरे दिल मेरे एहसास के दुश्मन कि इन के सामने कुछ भी नहीं है प्यार की क़ीमत वफ़ा का मोल क्या क्या है ऐतिबार की क़ीमत शिकस्ता कश्तियों टूटी हुई पतवार की क़ीमत है मेरी जीत से बढ़कर तो तेरी हार की क़ीमत हक़ीक़त ख़ून के आँसू तुझे रुलवाएगी जानाँ तू अपने फ़ैसले पर बा'द में पछताएगी जानाँ मेरे काँधे पे छोटे भाइयों की ज़िम्मेदारी है मेरे माँ बाप बूढ़े है बहन भी तो कुँवारी है बरहना मौसमों के वार को तू सह न पाएगी हवेली छोड़ कर तू झोपड़ी में रह न पाएगी अमीरी तेरी मेरी मुफ़्लिसी को छल नहीं सकती तू नंगे पाँव तो कालीन पर चल नहीं सकती
Abrar Kashif
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"भारत माँ के वीर" हम दिल से करते हैं बस एक ही काम भारत माँ के वीर जवानों तुम को सलाम चट्टानों से डट के अड़े हैं माँ के वीर सरहद पे तैयार खड़े हैं माँ के वीर इस मिट्टी के कण कण में है तेरा नाम हम दिल से करते हैं बस एक ही काम भारत माँ के वीर जवानों तुम को सलाम सारी कली का बाग़ यहीं है दुनिया में देश हमारा सब सेे हसीं है दुनिया में देश ये अपना ईश्वर का है इक इनआ'म हम दिल से करते हैं बस एक ही काम भारत माँ के वीर जवानों तुम को सलाम मीठी मीठी बोली में है देश का हुस्न रंगो की रंगोली में है देश का हुस्न इस की छाया में ही मिलता है आराम हम दिल से करते हैं बस एक ही काम भारत माँ के वीर जवानों तुम को सलाम संदल की ख़ुशबू वतन का वातावरण गंगा जी से शुद्ध हुआ हर अंतःकरण चारो दिशाओं में है यहाँ पाकीज़ा मक़ाम हम दिल से करते हैं बस एक ही काम भारत माँ के वीर जवानों तुम को सलाम
Ananya Rai Parashar
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"गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ" गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ तू जो है पास तो उजाला है वरना जीवन में बस अँधेरा है तेरे आने की जब ख़बर पाऊँ फूल से राह फिर सजाती हूँ गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ मेरे दिन रैन भी नहीं तुझ बिन एक ज़रा चैन भी नहीं तुझ बिन तू नज़र जब कहीं नहीं आता आँसू आँखों से बहाती हूँ गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ कितनी क़ातिल है दिल की तन्हाई जैसे धड़कन नहीं है, रूसवाई फिर कहीं लौट कर नहीं जाती तेरी आवाज़ पे जब आती हूँ गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ क़ैद कर लो तुम अपनी बाहों में एक बस मैं रहूँ निगाहों में मुझ सेा जोगन नहीं तू पाएगा नाम का गीत तेरे गाती हूँ गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ सुब्ह हो जाऊँ रात हो जाऊँ इस तरह तेरे साथ हो जाऊँ तेरी तस्वीर बेक़रारी में अपने सीने से मैं लगाती हूँ गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ मुझ सेा पागल कहाँ मिलेगा तुम्हें रश्म सब इश्क़ के निभाती हूँ गुनगुनाती हूँ मुस्कुराती हूँ जब तेरी याद में समाती हूँ
Ananya Rai Parashar
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"ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है" ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है दिल के तारो को छेड़ा है और दुखों का तोड़ लिखा है जीवन में जो कुछ होता है गुणा घटाना जोड़ लिखा है हँसी ठिठोली और आँसू है फिर दर्दों का सार लिखा है नाम तुम्हारा हर पन्ने पर जाने कितनी बार लिखा है हम ने अपनी हार लिखी है और तुम्हारी जीत लिखा है ये ना पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है तुलसी की पाती पर मैं ने दिल के सब मनुहार लिखा है प्यार हमारा अमर रहे ये क्या क्या है स्वीकार लिखा है इन अधरों से उन अधरों का जो भी है संवाद लिखा है अपने दिल के इन भावों का एक सरल अनुवाद लिखा है ये रिश्ता है अपना कितना पावन और पुनीत लिखा है ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है
Ananya Rai Parashar
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