nazmKuch Alfaaz

तुम इक दिन भूल जाओगे हँसाओगे रुलाओगे तुम इक दिन भूल जाओगे हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे दिखाओगे मुझे सपने ख़ुशी की वादियों वाले जज़ीरों में कहीं तन्हा मुझे तुम छोड़ आओगे हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे तुम्हें ना देख कर कितनी तड़पती हैं मेरी आँखें तुम्हें खो देने के डर से ये जागी हैं कई रातें उदासी छाई रहती है दिल-ए-बे-ताब में जितनी मुझे लगता नहीं है ये कि तुम भी छटपटाओगे हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे मुहब्बत कितनी है दिल में यक़ीनन कह न पाऊँगा मगर इतना यक़ीं तो है कि तुम बिन रह न पाऊँगा बड़े वादे किए तुम ने रहूँगा साथ मैं हमदम हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे हँसाओगे रुलाओगे तुम इक दिन भूल जाओगे हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे

Ambar2 Likes

Related Nazm

उस से मुहब्बत झीलें क्या हैं? उस की आँखें उम्दा क्या है? उस का चेहरा ख़ुश्बू क्या है? उस की साँसें ख़ुशियाँ क्या हैं? उस का होना तो ग़म क्या है? उस सेे जुदाई सावन क्या है? उस का रोना सर्दी क्या है? उस की उदासी गर्मी क्या है? उस का ग़ुस्सा और बहारें? उस का हँसना मीठा क्या है? उस की बातें कड़वा क्या है? मेरी बातें क्या पढ़ना है? उस का लिक्खा क्या सुनना है? उस की ग़ज़लें लब की ख़्वाहिश? उस का माथा ज़ख़्म की ख़्वाहिश? उस का छूना दुनिया क्या है? इक जंगल है और तुम क्या हो? पेड़ समझ लो और वो क्या है? इक राही है क्या सोचा है? उस से मुहब्बत क्या करते हो? उस से मुहब्बत मतलब पेशा? उस से मुहब्बत इस के अलावा? उस से मुहब्बत उस सेे मुहब्बत........

Varun Anand

475 likes

तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से

Zubair Ali Tabish

117 likes

"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है

Ali Zaryoun

70 likes

बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम, बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम कभी मैं जो कह दूँ मोहब्बत है तुम से तो मुझ को ख़ुदारा ग़लत मत समझना कि मेरी ज़रूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम हैं फूलों की डाली पे बाँहें तुम्हारी हैं ख़ामोश जादू निगाहें तुम्हारी जो काँटे हूँ सब अपने दामन में रख लूँ सजाऊँ मैं कलियों से राहें तुम्हारी नज़र से ज़माने की ख़ुद को बचाना किसी और से देखो दिल मत लगाना कि मेरी अमानत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम... कभी जुगनुओं की क़तारों में ढूँडा चमकते हुए चाँद तारों में ढूँडा ख़िज़ाओं में ढूँडा बहारों में ढूँडा मचलते हुए आबसारों में ढूँडा हक़ीक़त में देखा, फ़साने में देखा न तुम सा हँसी, इस ज़माने देखा न दुनिया की रंगीन महफ़िल में पाया जो पाया तुम्हें अपना ही दिल में पाया एक ऐसी मसर्रत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम है चेहरा तुम्हारा कि दिन है सुनहरा है चेहरा तुम्हारा कि दिन है सुनहरा और इस पर ये काली घटाओं का पहरा गुलाबों से नाज़ुक महकता बदन है ये लब हैं तुम्हारे कि खिलता चमन है बिखेरो जो ज़ुल्फ़ें तो शरमाए बादल फ़रिश्ते भी देखें तो हो जाएँ पागल वो पाकीज़ा मूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम जो बन के कली मुस्कुराती है अक्सर शब हिज्र में जो रुलाती है अक्सर जो लम्हों ही लम्हों में दुनिया बदल दे जो शाइ'र को दे जाए पहलू ग़ज़ल के छुपाना जो चाहें छुपाई न जाए भुलाना जो चाहें भुलाई न जाए वो पहली मोहब्बत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम

Tahir Faraz

54 likes

मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

Sahir Ludhianvi

52 likes

More from Ambar

"मुहब्बत मार डालेगी" न चाहा कर किसी को यूँँ कि चाहत मार डालेगी अभी भी वक़्त है सुन लो मुहब्बत मार डालेगी उन्हें अपना बनाने की ये हसरत मार डालेगी अभी भी वक़्त है सुन लो मुहब्बत मार डालेगी उन्हीं के ख़्वाब के पीछे रहोगे रात भर भागे उन्हीं का नाम लोगे बस दिखेगा कुछ नहीं आगे बड़े उलझे से होते हैं ये नाज़ुक प्रेम के धागे करोगे ज़िक्र उन का जब भी दिल में प्यार डालेगी अभी भी वक़्त है सुन लो मुहब्बत मार डालेगी तुम्हारे और हमारे बीच ये तक़रार डालेगी अभी भी वक़्त है सुन लो मुहब्बत मार डालेगी

Ambar

1 likes

"तुम आओगे ना" भले हमारे बीच में हो दूरियाँ सही न मिलने की लाख मजबूरियाँ सही ख़फ़ा हो गई हो ये मौसम की डाली रंगत को तरसे होंठों की लाली जब बिखरी सी लागे मुझे ज़िंदगानी तुम्हें ही पुकारे ये नैनन का पानी जब कोई आस न दिखे तुम्हारे आने की इन सभियों को झुठलाओगे ना? तुम आओगे ना तुम आओगे ना? कुछ ख़ास नहीं है ख़्वाहिश मेरी बस इतनी सी दुआ रहती सदा रहती है कि मेरी नादानियाँ, मेरी बचकानियाँ हमारे बीच की मिठास को खारा न करे बेचैनियों की आफ़त का इशारा न करे न हो कभी भी ख़फ़ा, वफ़ा हम सेे किन्हीं कारणों से जो मैं रूठ जाऊँ मनाओगे ना? तुम आओगे ना?

Ambar

0 likes

"पैग़ाम" जब भी ये बाद-ए-सबा छू के गुज़रती है मुझे जाने क्यूँ लगता है कि तुम ने पैग़ाम भेजा है आज तक भागता रहता हूँ सदाओं के पीछे के तू कहीं मिल जाएगी भावनाओं के पीछे चश्म-तर हुए बैठे हैं रंगीन घटाओं के पीछे जाने कैसा उभरता दर्द तू ने मेरे नाम भेजा है जब भी ये बाद-ए-सबा छू के गुज़रती है मुझे जाने क्यूँ लगता है कि तुम ने पैग़ाम भेजा है

Ambar

1 likes

"सालगिरह" कितने ख़्वाब थे दिल में और कितने अरमाँ सजाए थे हाँ आज वही दिन है जब तुम ज़िन्दगी में आए थे जगाये थे अरमाँ हबाब से ना सही किताब कुछ बाब से अब्र-ए-फ़लक ने भी रुख़ किया था मेरी ओर वीरान पड़ी ज़िन्दगी में तुम घटाएं बन छाए थे हाँ आज वही दिन है जब तुम ज़िन्दगी में आए थे

Ambar

1 likes

तुम सेे मिलना चाहे दिल तुम सेे मिलना चाहे दिल बातें करना चाहे दिल चाँद की इच्छा नहीं इस को केवल तुम को चाहे दिल दिल को कैसे समझाऊँ अपने हिस्से नहीं मंज़िल सच्चाई जो भी हो पर प्यार में दूरी है मुश्किल क़ुरबत से भी डर लागे दूरी भी ना चाहे दिल तुम सेे मिलने चाहे दिल बातें करना चाहे दिल

Ambar

1 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Ambar.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Ambar's nazm.