तुम सेे मिलना चाहे दिल तुम सेे मिलना चाहे दिल बातें करना चाहे दिल चाँद की इच्छा नहीं इस को केवल तुम को चाहे दिल दिल को कैसे समझाऊँ अपने हिस्से नहीं मंज़िल सच्चाई जो भी हो पर प्यार में दूरी है मुश्किल क़ुरबत से भी डर लागे दूरी भी ना चाहे दिल तुम सेे मिलने चाहे दिल बातें करना चाहे दिल
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मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है
Sahir Ludhianvi
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तुम्हारा फ़ोन आया है अजब सी ऊब शामिल हो गई है रोज़ जीने में पलों को दिन में, दिन को काट कर जीना महीने में महज़ मायूसियाँ जगती हैं अब कैसी भी आहट पर हज़ारों उलझनों के घोंसले लटके हैं चौखट पर अचानक सब की सब ये चुप्पियाँ इक साथ पिघली हैं उम्मीदें सब सिमट कर हाथ बन जाने को मचली हैं मेरे कमरे के सन्नाटे ने अँगड़ाई सी तोड़ी है मेरी ख़ामोशियों ने एक नग़्मा गुनगुनाया है तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है सती का चैतरा दिख जाए जैसे रूप-बाड़ी में कि जैसे छठ के मौक़े' पर जगह मिल जाए गाड़ी में मेरी आवाज़ से जागे तुम्हारे बाम-ओ-दर जैसे ये नामुमकिन सी हसरत है, ख़याली है, मगर जैसे बड़ी नाकामियों के बा'द हिम्मत की लहर जैसे बड़ी बेचैनियों के बा'द राहत का पहर जैसे बड़ी गुमनामियों के बा'द शोहरत की मेहर जैसे सुब्ह और शाम को साधे हुए इक दोपहर जैसे बड़े उनवान को बाँधे हुए छोटी बहर जैसे नई दुल्हन के शरमाते हुए शाम-ओ-सहर जैसे हथेली पर रची मेहँदी अचानक मुस्कुराई है मेरी आँखों में आँसू का सितारा जगमगाया है तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है
Kumar Vishwas
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उस से मुहब्बत झीलें क्या हैं? उस की आँखें उम्दा क्या है? उस का चेहरा ख़ुश्बू क्या है? उस की साँसें ख़ुशियाँ क्या हैं? उस का होना तो ग़म क्या है? उस सेे जुदाई सावन क्या है? उस का रोना सर्दी क्या है? उस की उदासी गर्मी क्या है? उस का ग़ुस्सा और बहारें? उस का हँसना मीठा क्या है? उस की बातें कड़वा क्या है? मेरी बातें क्या पढ़ना है? उस का लिक्खा क्या सुनना है? उस की ग़ज़लें लब की ख़्वाहिश? उस का माथा ज़ख़्म की ख़्वाहिश? उस का छूना दुनिया क्या है? इक जंगल है और तुम क्या हो? पेड़ समझ लो और वो क्या है? इक राही है क्या सोचा है? उस से मुहब्बत क्या करते हो? उस से मुहब्बत मतलब पेशा? उस से मुहब्बत इस के अलावा? उस से मुहब्बत उस सेे मुहब्बत........
Varun Anand
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बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम, बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम कभी मैं जो कह दूँ मोहब्बत है तुम से तो मुझ को ख़ुदारा ग़लत मत समझना कि मेरी ज़रूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम हैं फूलों की डाली पे बाँहें तुम्हारी हैं ख़ामोश जादू निगाहें तुम्हारी जो काँटे हूँ सब अपने दामन में रख लूँ सजाऊँ मैं कलियों से राहें तुम्हारी नज़र से ज़माने की ख़ुद को बचाना किसी और से देखो दिल मत लगाना कि मेरी अमानत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम... कभी जुगनुओं की क़तारों में ढूँडा चमकते हुए चाँद तारों में ढूँडा ख़िज़ाओं में ढूँडा बहारों में ढूँडा मचलते हुए आबसारों में ढूँडा हक़ीक़त में देखा, फ़साने में देखा न तुम सा हँसी, इस ज़माने देखा न दुनिया की रंगीन महफ़िल में पाया जो पाया तुम्हें अपना ही दिल में पाया एक ऐसी मसर्रत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम है चेहरा तुम्हारा कि दिन है सुनहरा है चेहरा तुम्हारा कि दिन है सुनहरा और इस पर ये काली घटाओं का पहरा गुलाबों से नाज़ुक महकता बदन है ये लब हैं तुम्हारे कि खिलता चमन है बिखेरो जो ज़ुल्फ़ें तो शरमाए बादल फ़रिश्ते भी देखें तो हो जाएँ पागल वो पाकीज़ा मूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम जो बन के कली मुस्कुराती है अक्सर शब हिज्र में जो रुलाती है अक्सर जो लम्हों ही लम्हों में दुनिया बदल दे जो शाइ'र को दे जाए पहलू ग़ज़ल के छुपाना जो चाहें छुपाई न जाए भुलाना जो चाहें भुलाई न जाए वो पहली मोहब्बत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम
Tahir Faraz
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"महबूबा के नाम" तू अपनी चिट्ठियों में मीर के अश'आर लिखती है मोहब्बत के बिना है ज़िंदगी बेकार लिखती है तेरे ख़त तो इबारत हैं वफ़ादारी की क़समों से जिन्हें मैं पढ़ते डरता हूँ वही हर बार लिखती है तू पैरोकार लैला की है शीरीं की पुजारन है मगर तू जिस पे बैठी है वो सोने का सिंहासन है तेरी पलकों के मस्कारे तेरे होंठों की ये लाली ये तेरे रेशमी कपड़े ये तेरे कान की बाली गले का ये चमकता हार हाथों के तेरे कंगन ये सब के सब है मेरे दिल मेरे एहसास के दुश्मन कि इन के सामने कुछ भी नहीं है प्यार की क़ीमत वफ़ा का मोल क्या क्या है ऐतिबार की क़ीमत शिकस्ता कश्तियों टूटी हुई पतवार की क़ीमत है मेरी जीत से बढ़कर तो तेरी हार की क़ीमत हक़ीक़त ख़ून के आँसू तुझे रुलवाएगी जानाँ तू अपने फ़ैसले पर बा'द में पछताएगी जानाँ मेरे काँधे पे छोटे भाइयों की ज़िम्मेदारी है मेरे माँ बाप बूढ़े है बहन भी तो कुँवारी है बरहना मौसमों के वार को तू सह न पाएगी हवेली छोड़ कर तू झोपड़ी में रह न पाएगी अमीरी तेरी मेरी मुफ़्लिसी को छल नहीं सकती तू नंगे पाँव तो कालीन पर चल नहीं सकती
Abrar Kashif
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"मुहब्बत मार डालेगी" न चाहा कर किसी को यूँँ कि चाहत मार डालेगी अभी भी वक़्त है सुन लो मुहब्बत मार डालेगी उन्हें अपना बनाने की ये हसरत मार डालेगी अभी भी वक़्त है सुन लो मुहब्बत मार डालेगी उन्हीं के ख़्वाब के पीछे रहोगे रात भर भागे उन्हीं का नाम लोगे बस दिखेगा कुछ नहीं आगे बड़े उलझे से होते हैं ये नाज़ुक प्रेम के धागे करोगे ज़िक्र उन का जब भी दिल में प्यार डालेगी अभी भी वक़्त है सुन लो मुहब्बत मार डालेगी तुम्हारे और हमारे बीच ये तक़रार डालेगी अभी भी वक़्त है सुन लो मुहब्बत मार डालेगी
Ambar
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तुम इक दिन भूल जाओगे हँसाओगे रुलाओगे तुम इक दिन भूल जाओगे हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे दिखाओगे मुझे सपने ख़ुशी की वादियों वाले जज़ीरों में कहीं तन्हा मुझे तुम छोड़ आओगे हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे तुम्हें ना देख कर कितनी तड़पती हैं मेरी आँखें तुम्हें खो देने के डर से ये जागी हैं कई रातें उदासी छाई रहती है दिल-ए-बे-ताब में जितनी मुझे लगता नहीं है ये कि तुम भी छटपटाओगे हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे मुहब्बत कितनी है दिल में यक़ीनन कह न पाऊँगा मगर इतना यक़ीं तो है कि तुम बिन रह न पाऊँगा बड़े वादे किए तुम ने रहूँगा साथ मैं हमदम हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे हँसाओगे रुलाओगे तुम इक दिन भूल जाओगे हक़ीक़त जानता हूँ मैं तुम इक दिन भूल जाओगे
Ambar
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"तुम आओगे ना" भले हमारे बीच में हो दूरियाँ सही न मिलने की लाख मजबूरियाँ सही ख़फ़ा हो गई हो ये मौसम की डाली रंगत को तरसे होंठों की लाली जब बिखरी सी लागे मुझे ज़िंदगानी तुम्हें ही पुकारे ये नैनन का पानी जब कोई आस न दिखे तुम्हारे आने की इन सभियों को झुठलाओगे ना? तुम आओगे ना तुम आओगे ना? कुछ ख़ास नहीं है ख़्वाहिश मेरी बस इतनी सी दुआ रहती सदा रहती है कि मेरी नादानियाँ, मेरी बचकानियाँ हमारे बीच की मिठास को खारा न करे बेचैनियों की आफ़त का इशारा न करे न हो कभी भी ख़फ़ा, वफ़ा हम सेे किन्हीं कारणों से जो मैं रूठ जाऊँ मनाओगे ना? तुम आओगे ना?
Ambar
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"सालगिरह" कितने ख़्वाब थे दिल में और कितने अरमाँ सजाए थे हाँ आज वही दिन है जब तुम ज़िन्दगी में आए थे जगाये थे अरमाँ हबाब से ना सही किताब कुछ बाब से अब्र-ए-फ़लक ने भी रुख़ किया था मेरी ओर वीरान पड़ी ज़िन्दगी में तुम घटाएं बन छाए थे हाँ आज वही दिन है जब तुम ज़िन्दगी में आए थे
Ambar
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इशारतें इशारों में हम ने जो बातें कही थी न समझे न जाने वो दिल की लगी थी बिछड़ना हुआ यूँँ कि कह भी न पाया मिरी ज़िंदगी तो तुम्हीं में बसी थी मुलाक़ात को हम तरसते रहेंगे ये अरमाँ के बादल बरसते रहेंगे नमी भर के आँखों में जीते रहेंगे जवानी के ज़ख़्मों को सीते रहेंगे मिरे दिल से निकलेगी बस ये सदाएंँ तिरे हिस्से की सारी ले लूँ बलाएंँ हुए दूर हम क्योंकि तेरी ख़ुशी थी मुहब्बत हमारी तो बस भूल ही थी इशारों में हम ने जो बातें कही थी न समझे न जाने वो दिल की लगी थी
Ambar
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