वक़्त लेते आना उन सेे कहना आना तो बस वक़्त लेते आना कुछ चुस्कियां चाय की संग लेते जाना थोड़ी गपशप के साथ कुछ यादें बनाना लेकिन आना तो बस वक़्त लेते आना कुछ पल रुकना कुछ पल ठहरना कुछ पुरानी यादों को फिर से बनाना एक पल के लिए ही सही वो यादें लेते आना लेकिन जब आना तो बस वक़्त लेते आना
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"जज़्बात" जो ये आँखों से बह रहा है कितने हम लाचार है तुम समझो तो इंतिज़ार है वरना कोई इंतिज़ार नहीं तुम्हारी याद में ऐसे डूबा जैसे कोई बीमार है तुम समझो तो बे-क़रार है वरना कोई बे-क़रार नहीं जो मेरी धड़कन चल रही है इन में बस तुम्हारा नाम है तुम समझो तो ये पुकार है वरना कोई पुकार नहीं इन हाथो से तुम्हारी ज़ुल्फ़ें सँवारनी हैं हर शाम तुम्हारे साथ गुज़ारनी है तुम समझो तो ये दुलार है वरना कोई दुलार नहीं तुम्हारे बस दिल में जगह नहीं तुम्हारी रूह से रिश्ता चाहिए तुम समझो तो ये आर-पार है वरना कुछ आर-पार नहीं तुम्हें मिल तो जाएगा मुझ सेे अच्छा सामने तुम्हारे तो क़तार है तुम्हें पता है ना तुम्हारी चाहत का बस एक हक़दार है बाकी कोई हक़दार नहीं तुम्हारी बाँहों में ही सुकून मिलेगा मुझे सच कहूँ तो दरकार है तुम समझो तो ये बहार है वरना कहीं बहार नहीं तुम्हारी गोद में आराम चाहिए तुम्हारी आवाज़ में बस अपना नाम चाहिए तुम समझो तो ये क़रार है वरना कोई क़रार नहीं तुम हो जो मेरे जीवन का तुम नहीं तो सब बेज़ार है तुम समझो तो ये आधार है वरना कोई आधार नहीं काश तुम भी हम सेे इक़रार करते चाहत की बरसात मूसला-धार करते मैं तुम सेे बेहद करता और तुम बेहद की भी हद पार करते तुम समझो तो इन सब के आसार हैं वरना कोई आसार नहीं अगर तुम कोशिश करते तो पता चलता की तुम हो तो घर-बार है तुम से ही मेरा संसार है वरना कोई संसार नहीं बिन तेरे ज़िन्दगी तो रहेगी काट लेंगे तुम्हारे बिना तुम समझो तो जीने का विचार है वरना कोई विचार नहीं ये दुनिया भले कुछ भी बोले तुम मेरी नहीं तो क्या मैं तुम्हारा तो हूँ ना यही मेरा इज़हार है अगर तुम समझो तो ये प्यार है वरना कोई प्यार नहीं
Divya 'Kumar Sahab'
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सदाक़त-ए-इश्क़ इश्क़ की तुम हक़ीक़त समझ लो इस को ग़म से गुज़रना पड़ेगा उन की यादों में मसरूफ़ हो तुम उन की यादों में रहना पड़ेगा दर्द-ए-दिल अपना तुझ को सुनाऊँ जी तो करता है तुझ को सुनाऊँ तेरी आँखों से कह देंगी आँसू अब मुझे भी निकलना पड़ेगा अपने भी रूठ जाएँगे तेरे रिश्ते भी छूट जाएँगे तेरे लोग तुझ को कहेंगे निकम्मा ऐसा लम्हा भी सहना पड़ेगा तू भरोसा भी करता है जिस पे बे-वजह होगा नाराज़ तुझ से होता अक्सर यहाँ ऐसा आशिक़ इश्क़ से हाँ मुकरना पड़ेगा वो तुझे भूल जाएँगे ऐसे जाने ज़िंदा रहेगा तू कैसे मशवरा बस यही देगा 'दानिश' अलविदा तुझ को कहना पड़ेगा
Danish Balliavi
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उस का चेहरा सिंपल सादा सा भोला चेहरा है यार क़सम से वो प्यारा चेहरा है पेड़ नदी ये फूल सभी छोड़ो उस को देखो उस का चेहरा है दुनिया लाख हसीन हो सकती है लेकिन उस का चेहरा चेहरा है देख उसे कह डाला हम ने भी बातें प्यारी हैं प्यारा चेहरा है इक तिल होट पे, गाल के नीचे इक और वो चाँद सा नाक पे नूर लिए दो प्यारी आँखें, और सुर्ख़ से लब प्यार मिलाकर अपना रंगों में हम ने बनाया उस का चेहरा है भोली सूरत पे वो अकड़ देखो ग़लती कर के घुमाया चेहरा है रूठ गई जो हम सेे कभी वो दोस्त सब सेे पहले चुराया चेहरा है जब भी उस को चूमने आए हम होट से पहले आया चेहरा है मुँह से इक वो स्वाद नहीं जाता जबसे उस का चूमा चेहरा है रात का होना उस की आँखें हैं दिन का निकलना उस का चेहरा है दुनिया में है उस के चेहरे से है नूर रौशनी लाया उस का चेहरा है हम जैसे भी दरिया करेंगे पार ! अब जो सहारा उस का चेहरा है हम आबाद रहेंगे ऐसे ही हम पे गर साया वो चेहरा है वो चेहरा है बस वो चेहरा है हम को बस वो चेहरा चेहरा है हम ने चाहा बस वो चेहरा है हम ने माँगा बस वो चेहरा है हम ने देखा भी तो वो चेहरा हम ने सोचा बस वो चेहरा है
BR SUDHAKAR
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"नाकारा" कौन आया है कोई नहीं आया है पागल तेज़ हवा के झोंके से दरवाज़ा खुला है अच्छा यूँँ है बेकारी में ज़ात के ज़ख़्मों की सोज़िश को और बढ़ाने तेज़-रवी की राह-गुज़र से मेहनत-कोश और काम के दिन की धूल आई है धूप आई है जाने ये किस ध्यान में था मैं आता तो अच्छा कौन आता किस को आना था कौन आता
Jaun Elia
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"इंतिज़ार" एक उम्र गुज़ार चुके तो महसूस किया है जिसे उम्र भर चाहा वो मग़रूर हुआ है एक शख़्स का इंतिज़ार हर वक़्त किया है वो जा चुका है हमें अब यक़ीन हुआ है तिरे इंतिज़ार ने बालों को सफेद किया है हम समझते रहे ये धूल का किया है
ALI ZUHRI
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'तलाश' कोई राह तलाशता हैं कोई शब्द तलाशता हैं सबकी अपनी मंजिल हैं कोई बस घर तलाशता हैं यहाँ मरना सब को हैं कोई बस जीवन तलाशता हैं एक मुलाक़ात के लिए कोई बस वक़्त तलाशता हैं वतन पर कुर्बान होकर कोई बस अमन तलाशता हैं सफ़र में साथ के लिए कोई बस हम सफ़र तलाशता हैं यहाँ सब मुसाफ़िर हैं हर कोई बस राह तलाशता हैं
Devansh gupta
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"ख़त" हम ने सोचा था करेंगे इश्क़ तो ख़त लिखेंगे सारी बातें बे-हिसाब यादें उन के संग लिखेंगे लिखेंगे मोहब्बत तो उस का ख़याल आएगा ख़त भरते भरते उन पर बे-हिसाब प्यार आएगा आएगा ख़याल उन का तो मेरी आँखें भर जाएँगी लबों पर उस का नाम होगा स्याही ख़त्म हो जाएगी हो जाएगी अगर स्याही ख़त्म तो क़लम बदले जाएँगे दिल की बात थोड़ी भी लिख गई तो ख़त भर जाएँगे ख़त भर जाएँगे तो दिल की बात अधूरी रह जाएगी समझ गई तुम तो ठीक नहीं तो हम अधूरे रह जाएँगे
Devansh gupta
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जब उस का जाना होगा जीवन आसान नहीं होगा जब उस का जाना होगा पूरा अरमान नहीं होगा जब उस का जाना होगा महफ़िल ग़मगीन रहेगी मेरी उस की यादों में अब मेरा ख़्वाब अधूरा होगा जब उस का जाना होगा रात सजेगा मंडप उस का गीत विरह के बाजेंगे यार मुझे तब रोना होगा जब उस का जाना होगा इक रोज़ उसे खो कर मुझ को याद पुरानी आएगी फिर भी मुझ को जीना होगा जब उस का जाना होगा इक गीत लिखूंँगा जिस में उस का मेरा मिलना होगा फिर बा'द मेरा मरना होगा जब उस का जाना होगा
Devansh gupta
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"मुकम्मल इश्क़" मुकम्मल इश्क़ मेरा मेरे बा'द किसी ग़ैर का ना रहा सब सज्दे मुकम्मल हुए बस तेरा आना विफल रहा तेरी नुमाइश पसंद आँखों का बढ़ा यहाँ पहरा रहा तुझे हर नज़र से बचाने को मैं तेरे साथ ठहरा रहा तुझे स्याही मानकर मैं अपनी किताब लिखता रहा तुझे उस में पाकर मैं उसे ज़िंदगी भर पढ़ता रहा तुझे इन्हीं लफ़्ज़ों से ताज का मुमताज़ बनाता रहा अपनी हर कहानी में हीर से राँझे को दूर कराता रहा तू बस इंतिज़ार कर, मैं ख़ुद को यही समझाता रहा तू बस ठहराव निकली वक़्त का, जो गुज़र जाता रहा
Devansh gupta
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