आब-ए-ग़म मेरी आँखों से चुराने वाला आजकल मेरी हर इक बात चुरा लेता है
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
Charagh Sharma
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ये किस का अक्स है हर सू समाया छुपा है कौन मेरी पुतलियों में
Shiva awasthi
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मैं ख़ुद पर भी हँस लेती हूँ देख चुकी हूँ इतना रो कर
Shiva awasthi
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रिश्ता हुआ तमाम तो पगली अना परस्त लौटा गई है तोहफ़े के कुंडल उतार के
Shiva awasthi
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तेरे रहते उस का चेहरा, कैसे शिकन ओढ़ सकता है? तू माँ है तो माँ होने का मतलब भी तो समझ सयानी
Shiva awasthi
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यही तो उम्र है नादानियों की, करने दें कहो माँओं से कि बच्चे को रुलाया न करें
Shiva awasthi
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