आबाद है शेर-ओ-सुख़न ख़ूँ से लिखी फ़नकारी है
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लिखी होगी मोहब्बत जिन सफ़ों पर मेरा दावा है वो नम ही मिलेंगे किसी दिन ऊब जाओगे सभी से तुम्हें उस रोज़ फिर हम ही मिलेंगे
Ritesh Rajwada
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हम ने ग़ज़लों में हुक़ूमत को लिखी है 'लानत धमकियाँ आती हैं, इन'आम तो आने से रहा
Harman Dinesh
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दिल आबाद कहाँ रह पाए उस की याद भुला देने से कमरा वीराँ हो जाता है इक तस्वीर हटा देने से
Jaleel 'Aali'
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दिल के वीराने को यूँँ आबाद कर लेते हैं हम कर भी क्या सकते हैं तुझ को याद कर लेते हैं हम
Wamiq Jaunpuri
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ग़ैर से खेली है होली यार ने डाले मुझ पर दीदा-ए-ख़ूँ-बार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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उम्र भर मैं ने की है इबादत तिरी इश्क़ की तब हुई है इनायत तिरी
Rizwan Khoja "Kalp"
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शोहरत क्या बख़्शेगी हमें दुनिया जो ख़ुद नाकारी है
Rizwan Khoja "Kalp"
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शाना-ब-शाना हैं खड़े दर पे तिरे छोटा बड़ा कोई नहीं दरबार में
Rizwan Khoja "Kalp"
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पेड़ गिन काटी थी राहें ख़र्च गिन कर कट रही है अम्न की उम्मीद में हैं और नफ़रत बट रही है
Rizwan Khoja "Kalp"
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पेड़ गिन काटी थी राहें ख़र्च गिन कर कट रही है
Rizwan Khoja "Kalp"
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