आड़ ले कर नए दौर के इल्म की फ़ोन ने चिट्ठियों का गला घोंटा है
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जौन तुम्हें ये दौर मुबारक, दूर ग़म-ए-अय्याम से हो एक पागल लड़की को भुला कर अब तो बड़े आराम से हो
Jaun Elia
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काश उस का फ़ोन आ जाए किसी दिन और मैं एक घंटी में उठा कर बोल दूँ सब ठीक है
Tanoj Dadhich
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उस के क़त्ल पे मैं भी चुप था मेरा नंबर अब आया मेरे क़त्ल पे आप भी चुप हैं अगला नंबर आप का है
Nawaz Deobandi
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उस के लबों को चूम के ये इल्म हो गया मुझ को वो ज़हर के बिना भी मार सकती है
Harsh saxena
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ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं
Jaan Nisar Akhtar
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हम घिस रहे थे इश्क़ की उम्मीद में दिल का चराग़ क़िस्मत मुबारक हो वहाँ से दर्द का जिन्न निकला है
Intzar Akhtar
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कुछ मोहब्बत है और बाक़ी दर्द और दुनिया में रक्खा ही क्या है
Intzar Akhtar
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हम उस के 'ऊँ हूँ' 'तो क्या' 'नईं' पर इस लिए भी रुके हैं महबूब ज़िद्दी न हो तो फिर आशिक़ी बे-मज़ा है
Intzar Akhtar
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ये कह के उस की सहूलियत का ख़याल रक्खा है मैं ने ख़ुद ही अगर मैं पूछूँ कि बात हो सकती है हमारी तो कहना "ऊँ हूँ"
Intzar Akhtar
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क्यूँँ मुझे ऐसा कभू लगता है चाँद के रिश्ते में तू लगता है मैं ने अब छोड़ दिया दिल का काम दिल के कामों में लहू लगता है
Intzar Akhtar
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