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आज बादल के सहारे उस ने ख़त भेजा हमें आसमाँ क़ासिद है कैसा लफ़्ज़ बरसाता नहीं

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तेरी ख़ता नहीं जो तू ग़ुस्से में आ गया पैसे का ज़ो'म था तेरे लहजे में आ गया सिक्का उछालकर के तेरे पास क्या बचा तेरा ग़ुरूर तो मेरे काँसे में आ गया

Mehshar Afridi

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रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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फोन भी आया तो शिकवे के लिए फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ रास्ते की मुश्किलें तो जान लूँ आता होगा उस का ठुकराया हुआ

Balmohan Pandey

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इसी से जान गया मैं कि बख़्त ढलने लगे मैं थक के छाँव में बैठा तो पेड़ चलने लगे मैं दे रहा था सहारे तो इक हुजूम में था जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे

Farhat Abbas Shah

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मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो आसमाँ लाए हो ले आओ ज़मीं पर रख दो

Rahat Indori

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ज़ख़्म तुझ को नवाज़ दूँ भी गर पर न धोखा मैं दिलरुबा दूँगा

Shan Sharma

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मुझे अच्छा नहीं लगता ये कहना हमनवाई में हुआ पर है बहुत नुक़सान तुझ सेे आशनाई में दिया है वक़्त जितना इक तिरी इस चाह को मैं ने ख़ुदा मिल जाता है इतने दिनों की पारसाई में

Shan Sharma

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लिखी थी जो तुम्हें बेनाम सी वो चिट्ठियाँ हैं कहीं थोड़ी शिकायत है कहीं कुछ अर्ज़ियाँ हैं तुम्हारे बा'द दिल में याद ठहरी और घर में जले फ़िल्टर रखे हैं और थोड़ी तीलियाँ हैं

Shan Sharma

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मना करते उसे थे जो वही वो कर दिखाती थी मैं सूरज को उगाता था वो रातें खींच लाती थी अभी भी तुम में ज़िंदा है वही बेबाक़ सी लड़की ज़माने के उसूलों पे जो खुल के मुस्कुराती थी

Shan Sharma

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बा'द शादी के मिलने आए थे कह रहे हो चुके पराए थे उन के कानों में थे वही झुमके इश्क़ में हम ने जो दिलाए थे

Shan Sharma

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