आख़िरश क्यूँ करें ज़ाईदा नया तिफ़्ल 'अमित' इस सेे बढ़िया है पिदर-मुर्दा उठा लाएँ कोई
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आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं दिन में सौ बार याद करता हूँ पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं
Aadil Rasheed
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अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा
Mahshar Badayuni
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कोई तुम्हारा सफ़र पर गया तो पूछेंगे रेल देख के हम हाथ क्यूँ हिलाते हैं
Tehzeeb Hafi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ये ज़िन्दगी कुछ इस तरह से पास मेरे आई है अब तो अमित केवल यहाँ तन्हाई ही तन्हाई है
Daqiiq Jabaalii
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ये तआक़ुब में फ़क़त अहल-ए-हवस हैं प्यारे ये भरम छोड़ कि उश्शाक़ बहुत हैं मेरे
Daqiiq Jabaalii
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ये सोचता ख़राब है कहता ख़राब है दावे से कह रहा हूँ ये बंदा ख़राब है
Daqiiq Jabaalii
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तुम कुछ भी कहते रहते हो तुम भी औरों के जैसे हो
Daqiiq Jabaalii
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तुम ख़ुश-नसीब हो जो कि रो लेते हो मियाँ दिक्कत हमारे साथ है हम क्या करें ‘अमित’
Daqiiq Jabaalii
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