आख़िरी वक़्त पलट कर भी न देखा तुम ने तुम तो आई ही थी उस रात चली जाने को
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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तुझ सेे पहले मैं ने उस को रक्खा नइँ रब को मुझ सेे यही शिकायत होती है
Lalit Sachdeva
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टूट के भी मेरा दिल तेरा ही रहेगा टूट के भी तारे नभ के कहलाते हैं
Lalit Sachdeva
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मेरा दिल जब ज़ोर से रोने लगता है आँखें माँ से पहले तुझ को ढूँढती हैं
Lalit Sachdeva
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हैं पाँच संतानें मेरे घर कुंती की भी कोई भी दुख हो पाँचों में बँट जाता है
Lalit Sachdeva
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क़ैद है मुझ सा ही कोई मुझ में भी जो है बाहर वो यक़ीनन मैं नहीं
Lalit Sachdeva
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