aane wali naslen tum par fakhr karengi ham-asro jab bhi un ko dhyan aaega tum ne 'firaq' ko dekha hai the poet addresses his peers and turns a simple meeting into a badge of honor. seeing the poet becomes a kind of “witness” to greatness, something later generations will admire. the couplet blends self-aware fame with the idea of legacy: a moment of presence today becomes pride and memory tomorrow.
Related Sher
हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
149 likes
किस ने दस्तक दी ये दिल पर कौन है आप तो अंदर हैं बाहर कौन है
Rahat Indori
141 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
157 likes
अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
221 likes
More from Firaq Gorakhpuri
बर्क़-ए-फ़ना भी खाए जहाँ ठोकरें 'फ़िराक़' राह-ए-वफ़ा में आते हैं ऐसे मक़ाम भी
Firaq Gorakhpuri
9 likes
हर फ़रेब-ए-ग़म-ए-दुनिया से ख़बरदार तो है तेरा दीवाना किसी काम में हुशियार तो है
Firaq Gorakhpuri
11 likes
बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा'लूम जो तेरे हिज्र में गुज़री वो रात रात हुई
Firaq Gorakhpuri
7 likes
तू याद आया तेरे जौर-ओ-सितम लेकिन न याद आए मोहब्बत में ये मा'सूमी बड़ी मुश्किल से आती है
Firaq Gorakhpuri
16 likes
ये न पूछ कितना जिया हूँ मैं ये न पूछ कैसे जिया हूँ मैं कि अबद की आँख भी लग गई मेरे ग़म की शाम-ए-दराज़ में
Firaq Gorakhpuri
14 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Firaq Gorakhpuri.
Similar Moods
More moods that pair well with Firaq Gorakhpuri's sher.







