आप ही बस ख़ास रहबर हैं मिरे कीजिए सरकार अब नज़रे करम है बड़ी हसरत कि आक़ा एक दिन आप का दीदार हो देखूंँ हरम
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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ज़माने से उलझना छोड़ दो ऐ हिंद के लोगों हमारा काम तो बस मुल्क को आगे बढ़ाना है
Faizan Faizi
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हम गरीबों पे इनायत कीजिए हैं परेशां हम सभी आक़ा यहाँ
Faizan Faizi
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नए लोगों में बैठो यार लेकिन बुरे इंसान में दिखना नहीं तुम तुम्हें भी मार डालेगी ये दुनिया हुकूमत पर कभी लिखना नहीं तुम
Faizan Faizi
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छोड़ कर रस्ता हमें तब्दील करना पड़ रहा मिल रहे थे ख़ूब धोखे यार के साए तले
Faizan Faizi
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सुनो मजनूंँ बने फिरते रहोगे यार कब तक तुम हमारा मशवरा है इश्क़ कोई दूसरा कर लो
Faizan Faizi
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