आशिक़ी सिर्फ़ रुसवाई देती है और आशिक़ों का कोई मक़बरा भी नहीं
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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कुछ किताबें हैं बस ताक़ पर और हर तरफ़ बिखरे यादों के साए
Amaan Pathan
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वो शे'र जिस को सुन के लोग ग़म-ज़दा हुए वो शे'र तो लिखा था कोई चौथी क्लास में
Amaan Pathan
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अस्ल क़ातिल तो सामने है मगर तुम को इल्ज़ाम मुझ पे धरना है
Amaan Pathan
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इन ख़ुश्क धड़कनों की शिफ़ा करते करते हम दरिया किनारे दिल ये कई बार रख चुके
Amaan Pathan
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अब नहीं चाहिए शिफ़ा मुझ को दर्द अब हो मुझे तो पैहम हो
Amaan Pathan
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