बे-वजह क्यूँँ मिरे दिल तू धकधक करे इक नज़र दर पे और इक घड़ी की तरफ़
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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हम सेे कटता नहीं ग़मों का पहाड़ लोग कहते हैं ज़िंदगी कम है
Anjali Sahar
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दिल-ए-नादाँ तू गर नहीं होता ग़म न होता ख़ुशी नहीं होती गर हमें सब्र-ओ-ज़ब्त आ जाता अपनी जन्नत यही ज़मीं होती
Anjali Sahar
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ज़िंदगी अब कुछ और नहीं दरकार मुझे अच्छी भली उदासी है
Anjali Sahar
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पढ़ रहा था वो मेरे चेहरे को मैं ने फिर जल्दी से चेहरा बदला
Anjali Sahar
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लौट कर आए कोई कुछ तो ख़बर हो हम को किस जहाँ को चले जाते हैं ये मरने वाले
Anjali Sahar
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