दिल-ए-नादाँ तू गर नहीं होता ग़म न होता ख़ुशी नहीं होती गर हमें सब्र-ओ-ज़ब्त आ जाता अपनी जन्नत यही ज़मीं होती
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हम सेे कटता नहीं ग़मों का पहाड़ लोग कहते हैं ज़िंदगी कम है
Anjali Sahar
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बे-वजह क्यूँँ मिरे दिल तू धकधक करे इक नज़र दर पे और इक घड़ी की तरफ़
Anjali Sahar
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अपने अपनों के दिलों में सब उतर जाते हैं बा'द मरने के सितारा नहीं बनता कोई
Anjali Sahar
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ज़िंदगी अब कुछ और नहीं दरकार मुझे अच्छी भली उदासी है
Anjali Sahar
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पढ़ रहा था वो मेरे चेहरे को मैं ने फिर जल्दी से चेहरा बदला
Anjali Sahar
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