बे-ज़ारी से बू ना आए तो फिर आँसू चख के देख चारा-गर बोला रोने की अपनी लज़्ज़त होती है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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उन्हें खो कर ये माना हम सिफ़र हैं मुयस्सर पर उन्हें भी हम कहाँ हैं
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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ग़ज़ल को कुछ नए चेहरे नए अश'आर देता हूँ मैं यूँँ अल्फ़ाज़ के ख़ंजर को अपने धार देता हूँ कभी जब तैश में चाहूँ किसी का क़त्ल करना मैं तो फिर ग़ुस्से में आ कर शे'र कोई मार देता हूँ
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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ये जो इश्क़–ओ–उल्फ़त वाली भोली-भाली बातें हैं सुन तुझ को इक बात बताऊँ सारी ख़ाली बातें हैं हाँ इक ऐसा दौर था जिस में बातें ख़त्म न होती थीं अब बातें होने की बातें सिर्फ़ ख़याली बातें हैं
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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कौन छेड़े फिर वही क़िस्सा पुराना आतिशों का काम है जलना जलाना
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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करवट-करवट घूँट-घूँट भर, स्याह रात गुज़री ऐसे नींद किसी ने तह कर के, अलमारी में रख दी जैसे
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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