बस इक तलब थी उस समय इरशाद की कुछ शे'र हम को भी सुनाने थे उसे
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हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है
Pratap Somvanshi
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कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं
Umair Najmi
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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हाल न पूछो मोहन का सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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वो माँगते हम सेे हमारी ज़िंदगी हम तब थमा देते हमारी वो क़लम
Hemant Sakunde
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उस फूल से ख़ुशबू चुरा लूँ मैं अगर दो चार काँटे भी चुभे तो डर नहीं
Hemant Sakunde
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सोचता हूँ छोड़ दूँ अब शे'र कहना सोच कर इक शे'र कैसे चुप रहूँ मैं
Hemant Sakunde
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क़ुदरत अचानक क्यूँ हसीं लगने लगी ये इक नई मुस्कान उल्फ़त तो नहीं
Hemant Sakunde
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सब राज करना चाहते जिस क़ल्ब पर उस पर सियासत तो हमारी ही रही
Hemant Sakunde
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