बस ख़ुद-कुशी से बचने का जरिया है शा'इरी हम को सुख़न-वरी से तो शोहरत तलब नहीं
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Zia Mazkoor
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तुम्हारा भी दुखाएगा कोई दिल तुम्हें भी शा'इरी अच्छी लगेगी
Tanoj Dadhich
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शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है
Bashir Badr
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चुन लिया किश्तों में मरना तब बहुत सोचा नहीं फ़ैसला करना था मुझ को ख़ुद-कुशी या शा'इरी
Divya 'Kumar Sahab'
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ग़ुस्सा भी माँ का प्यार से तो कम नहीं मैं मर-मिटूँगा इतनी प्यारी चीख पर
Sabir Hussain
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हम जो थे कभी सिकंदर अपनी दुनिया के उन के हाथों का खिलौना बन कर रह गए
Sabir Hussain
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ता-कयामत प्यासे सब दरिया रहेंगे दरिया की तो तिश्नगी ख़ुद कर्बला हैं
Sabir Hussain
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शोर-ओ-गुल माज़ी के अपने याद कर के तन्हा बूढ़ा घर बिलख कर रो रहा है
Sabir Hussain
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उम्मीद ए विसाल ए जांँ मिसमार हुई नहीं ये दामन-ए-शब अभी दुश्वार हुई नहीं उस ने भी शब-ए-गुज़श्ता क़ैद रखी हवस हम सेे भी बदन की सरहद पार हुई नहीं
Sabir Hussain
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