दिल-लगी को दिल-लगी से जीत जाने का हुनर हम को आता ही नहीं है इस ज़माने का हुनर
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ये सोच कर किसी मजनूँ ने हाथ काटे हैं वो हाथ रख दे किसी ज़ख़्म पर तो शादाबी
Hameed Sarwar Bahraichi
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कैसा मंज़र था उन की आँखों में इक समुंदर था उन की आँखों में
Hameed Sarwar Bahraichi
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एक किरदार सिमट आया फ़साने भर में ज़ख़्म नासूर हुआ सब को दिखाने भर में थी बड़ी बात बदलता जो हमारा मेआ'र वरना ये साल ही बदलेगा ज़माने भर में
Hameed Sarwar Bahraichi
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कमाल ये नहीं उस को भुला चुका हूँ मैं कमाल ये है बहुत दूर जा चुका हूँ मैं वो छोड़ कर के गया जिस मुक़ाम पर मुझ को उसी मुक़ाम को मंज़िल बना चुका हूँ मैं
Hameed Sarwar Bahraichi
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हमारे ख़्वाब समुंदर में डूब जाते हैं सो अपने ख़्वाब में हम कश्तियाँ बनाते हैं
Hameed Sarwar Bahraichi
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