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इक शहनशाह ने बनवा के हँसी ताजमहल हाथ कटवाए ग़रीबों के, हुनर छीन लिया

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ले हम भी सर उठाते हैं मुहब्बत दिखा जो दाँव आते हैं मुहब्बत अलिफ़ से मीम तक लाए थे जिन को वो हम को ही सिखाते हैं मुहब्बत

Daagh Aligarhi

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जिस की इक तस्वीर ले आई लहू इन आँखों में वो मुक़ाबिल आएगा तो आँखें ही ले जाएगा

Daagh Aligarhi

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सारी दुनिया से किनारा भी नहीं कर सकते तेरी यादों पे गुज़ारा भी नहीं कर सकते रू-ब-रू आज हुए भी तो हुए ऐसी जगह हम कोई साफ़ इशारा भी नहीं कर सकते

Daagh Aligarhi

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मिटते मिटते मिटती है हो अगर कसक कोई ज़ख़्म चाहे जैसा हो, भरते भरते भरता है

Daagh Aligarhi

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आप हैं दोस्त तो फिर आपसे दुश्मन बेहतर राम को याद तो कर लेता था रावण अक्सर आप मज़बूर थे बिकने को बिके मंदे में हमनें बाजार की शर्तों को लगा दी ठोकर

Daagh Aligarhi

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