एक तो बेदाग़ है सीरत भी उस की और लब पर तिल बड़ा बदमाश उस का
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अब मैं समझा तिरे रुख़्सार पे तिल का मतलब दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बिठा रक्खा है
Qamar Moradabadi
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जिस को बड़ा ग़ुरूर था अपने वजूद पर वो आफ़ताब शाम की चौखट पे मर गया
Shahid Sagri
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अब तो उस सूने माथे पर कोरेपन की चादर है अम्मा जी की सारी सजधज, सब ज़ेवर थे बाबूजी कभी बड़ा सा हाथ ख़र्च थे कभी हथेली की सूजन मेरे मन का आधा साहस, आधा डर थे बाबूजी
Aalok Shrivastav
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पूछ मुझ सेे कि तेरे होंठ पे तिल है क्यूँँ कर ऐसा नुक़्ता कहीं नादान समझते होंगे
Ameer Imam
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कल दोपहर अजीब इक बे-दिली रही बस तिल्लियाँ जलाकर बुझाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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ज़िंदगी तू बदल गई लेकिन हम से क्या हो सका मोहब्बत में
Manish Pithaya
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तर्जनी पर गिन सज़ा के दिन मेरे तू इक मुझी पर जुर्म का दावा चला है
Manish Pithaya
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उठी थी आग चिंगारी से देखो लगी थी शक कि बीमारी से देखो कि दानाई को तुम रक्खो परे अब निभा के तुम भी दिलदारी से देखो
Manish Pithaya
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मुसलसल हम भटकते तीरगी में न लाते गर हमें तुम रौशनी में
Manish Pithaya
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ज़माने को ज़रूरत है मोहब्बत की मुरव्वत की मगर हम ने तो नफ़रत के सिवा दिल में रखा क्या है
Manish Pithaya
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