फँसी कश्ती हमारी है दुखों का बोझ भारी है सँभल कर चल रहा हूँ जो दया गिरधर तुम्हारी है
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वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से वो और थे जो हार गए आसमान से
Faheem Jogapuri
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मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे
Tehzeeb Hafi
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उन के दुखों को शे'र में कहना तो था मगर लड़के समझ न पाएँ कभी लड़कियों का दुख
Ankit Maurya
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यहाँ तुम देखना रुतबा हमारा हमारी रेत है दरिया हमारा
Kushal Dauneria
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तू दिल पे बोझ ले के मुलाक़ात को न आ मिलना है इस तरह तो बिछड़ना क़ुबूल है
Unknown
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जो लगेगा मौक़ा तो पूछेंगे हम इश्क़ ये मरहम है तो किस के लिए
Shubham Rai 'shubh'
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साँस लेने के भी पैसे देने होंगे इस क़दर महँगाई बढ़ती जा रही है
Shubham Rai 'shubh'
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अना पर बात आए लहरों को भी मोड़ दूँगा कटे गर्दन भले तेरी अकड़ मैं तोड़ दूँगा रहूँगा शान से चाहे खड़ी हो मौत सम्मुख झुकाऊँगा न सर अपना ये साँसें छोड़ दूँगा
Shubham Rai 'shubh'
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ई डी का शोर है चुप-चाप रहो सत्ता पुर-ज़ोर है चुप-चाप रहो भागकर मुझ सेे तू जाएगा कहाँ रेड हर ओर है चुप-चाप रहो
Shubham Rai 'shubh'
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दिन फिरे हैं तो मिलने आए हो ये मोहब्बत मैं सब समझता हूँ तीरगी में न साथ था कोई भीड़ क्यूँँ है ये अब समझता हूँ
Shubham Rai 'shubh'
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