गिरते पड़ते हुए हर शख़्स सँभल जाता है मसअला कुछ भी हो हल उस का निकल जाता है यूँँ न घबरा मेरे मन वक़्त की चालाकी से वक़्त कैसा भी हो इक दिन वो बदल जाता है
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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याद भूले हुए लोगों को किया जाता है भूल जाओ कि तुम्हें याद किया जाएगा
Charagh Sharma
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जब भी घंटी बजती है और नाम तुम्हारा आता है हाथ से पहले दिल मेरा ये फ़ोन उठाने जाता है
Tanoj Dadhich
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मुझ सेे हर शख़्स रूठ जाता है मेरा होना भी मसअला है इक
Vishal Singh Tabish
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इशारा कर रहे हैं बाल ये बिखरे हुए क्या तू मेरे पास आया है कहीं होते हुए क्या ये इतना हँसने वाले इश्क़ में टूटे हुए लोग तू इन से पूछना अंदर से भी अच्छे हुए क्या
Kushal Dauneria
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ज़िक्र करता था जो दिन भर उस का हिज्र में मर गया शायर उस का सुनता रहता हूँ पशेमाँ हो कर ज़िक्र जब करते हैं दीगर उस का
Daqiiq Jabaalii
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ज़ीस्त की सम्त से ताज़ीर बराबर आई पर मुबीं होता नहीं ग़लती हमारी क्या है
Daqiiq Jabaalii
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ये ज़िन्दगी कुछ इस तरह से पास मेरे आई है अब तो अमित केवल यहाँ तन्हाई ही तन्हाई है
Daqiiq Jabaalii
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मेरे क़रीब आ ज़रा नज़रें उतार दूँ ये ज़ुल्फ़ें क्या हैं ला तेरी किस्मत सँवार दूँ बैठी रहो यूँँ ही मेरी नज़रों के सामने तुम को निहारते हुए 'उम्रें गुज़ार दूँ
Daqiiq Jabaalii
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ख़ुदाया वस्त-ए-तकल्लुम बहुत सुकून मिला जब उन लबों ने कहा तुम बहुत सुकून मिला
Daqiiq Jabaalii
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