ghurbat ki tez aag pe aksar pakai bhuk khush-haaliyon ke shahr mein kya kuchh nahin kiya
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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं
Ali Zaryoun
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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ये किस ने बाग़ से उस शख़्स को बुला लिया है परिंद उड़ गए पेड़ों ने मुँह बना लिया है उसे पता था मैं छूने में वक़्त लेता हूँ सो उस ने वस्ल का दौरानिया बढ़ा लिया है
Tehzeeb Hafi
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अपना सब कुछ हार के लौट आए हो न मेरे पास मैं तुम्हें कहता भी रहता था कि दुनिया तेज़ है
Tehzeeb Hafi
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वो चाँद है तो अक्स भी पानी में आएगा किरदार ख़ुद उभर के कहानी में आएगा
Iqbal Sajid
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मारा किसी ने संग तो ठोकर लगी मुझे देखा तो आसमाँ था ज़मीं पर पड़ा हुआ
Iqbal Sajid
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सूरज हूँ ज़िंदगी की रमक़ छोड़ जाऊँगा मैं डूब भी गया तो शफ़क़ छोड़ जाऊँगा
Iqbal Sajid
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पिछले बरस भी बोई थीं लफ़्ज़ों की खेतियाँ अब के बरस भी इस के सिवा कुछ नहीं किया
Iqbal Sajid
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मिले मुझे भी अगर कोई शाम फ़ुर्सत की मैं क्या हूँ कौन हूँ सोचूँगा अपने बारे में
Iqbal Sajid
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